Sunday, 8 October 2023

७५ दिन का फिटनेस चुनौती अंकित बैनपुरिया ने कैसे जीता और मोदी जी उनसे मिलने गए l How Ankit (Haryana) won Fitness Challenge

 देश में इतने बड़े बड़े नमी स्वास्थ्य और सौष्ठव (fitness)  हीरो है, फिर भी भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी  ने अंकित बैनपुरिया को ही क्यों चुना? अंकित  ने ये स्वास्थ्य परीक्षा की चुनौती  ७५ दिन के दिनचर्या किस प्रकार पालन की । बैनपुरिया गांव के अंकित का नाम कैसे पहुंचा पीएमओ के पास?

हरियाणा राज्य के जिला  सोनीपत के अंकित बैनपुरिया, किसी राजनितिक दल के प्रतिनिधि नहीं हैं, न किसी परदे के  कलाकार, न कोई अन्य प्रतिष्ठा का मंच है न कोई बड़े अधिकारी है, फिर भी इनसे मिलने खुद पीएम आए। फिटनेस फ्रीक होना इनकी असली पहचान है पर फिर तो ऐसे फिटनेस वाले बॉलीवुड में और क्रिकेट जगत में कितने है। फिर भी अंकित का नाम ही चुना गया। इसकी कहानी छिपी है ७५ दिन के रूटीन में।

विडियो में अंकित पार्क में खड़े है, पीएम खुद चलकर उनके पास आए और उन्ही की स्टाइल में "राम राम जी साराय ने" कहा। और फिर दोनो ने मिलकर सफाई की। पीएम ने अंकित के साथ सफाई करके एक ऐसा संदेश देने की कोशिश की कि स्वच्छता के साथ साथ फिटनेस पर भी ध्यान देना चाहिए।

अंकित का सोशल मीडिया देखेंगे तो पता चलेगा कि फिटनेस ही इनकी पहचान है। कुछ साल पहले तक इन्हें कोई नही जानता था। ७५ दिन का चैलेंज लाकर ये ज्यादा फेमस हो गए। ७५ दिन के हार्ड चैलेंज में सबसे बड़ी चुनौती ये थी की अगर कोई भी काम छूटा तो पहले दिन से फिर शुरू करना पड़ेगा।

इस चैलेंज के ५ बड़े हिस्से है.

१. सुबह ४५ मिनिट की एक्सरसाइज।

२. सेल्फी लेना(जिससे फिटनेस पर हुआ फर्क मालूम पड़े)

३. २४ घंटे में ४ लीटर पानी पीना।

४. पौष्टिक आहार लेना।

५. धार्मिक किताब पढ़ना।

इस दौरान दो बाते क्लियर थी, नशे का सेवन नहीं करना और ब्रह्मचर्य का पालन करना। यही वो दो बाते थी जिसने अंकित को पीएम मोदी से मिलवा दिया।

अंकित मजदूर के बेटे है। १३ साल पहले पहलवानी शुरू की, लेकिन कंधे और घुटने में चोट आई तो पहलवानी छोड़नी पड़ी। गरीब परिवार से होने की वजह से दूध, लस्सी और रोटी खाने को मिली. पर किसी भी तरह के प्रोटीन के पैसे नही मिल पाए। हालाकी अंकित खुद भी प्रोटीन से दूर रहना चाहते थे। वो युवाओं को यही कहते है की अगर ये पांच नियम मान लिए जाए तो फिर कुछ भी कर सकते हो। ७५ दिन ठीक यही रूटीन फॉलो करके आपके बच्चे भी सफलता पा सकते है।

शायद मोदी ने अंकित को इसीलिए बुलाया ताकि लोग दो बाते समझ सके की अनुशासन जिंदगी में सबसे ज्यादा जरूरी है और नॉनवेज से बॉडी नही बनती। अंकित बिलकुल शाकाहारी है, पहले अंडे खाते थे फिर वो भी छोड़ दिए। जिस दौर में नशे का सेवन बढ़ रहा है, अंकित जैसों का सामने आना जरूरी है जिनसे आज की और आने वाली पीढ़ी सिख ले सके।