Thursday, 10 July 2025

आपको पनीर पसंद है ? तो केवल घर में बना कर सेवन करें ?? वरना विष खाते रहिये ...

 जनचेतना का एक गिलहरी प्रयास

प्रिय पाठकों ,

मैं हर जगह ग्राहकों को भोजन के व्यंजनों के बारे में चेताता हूँ l घी और  पनीर के बारे में में भी बतात हूँ  कि बाज़ार में और भोजनालयों , बड़े नामी होटल और रेस्टोरेंट, विवाह और जन्मदिन के भोज मिओं भी नकली पनीर और नकली घी धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है l दूध घी के व्यापारी  (डेरी ) के यहाँ भी पनीर असली नहीं है क्योंकि वे भी किसी से करीद कर ला रहे हैं और नकली ही ला रहे हैं l 

पनीर को जांचने के लिए अमोनिया की डॉ बूँद दाल कर देखें यदि पनीर का रंग काला होने लगे तो पनीर नकली ही है l चूंकि अमोनिया सबके पास नहीं मिलेगा इसलिए  मैंने पनीर के साफ़ सफ़ेद  टुकड़े पर नमाक गिरा कर भी जांचा , वो काला पड़ने लगा l 

इसी प्रकार असली घी भी ३०० - ४०० रूपये किलो मिल रहा है तो शत प्रतिशत वो नकली ही है l 

सावधान रहे l जहर ना खाइए l सस्ता मिले तो भी क्या पेट्रोल वाले स्कूटर कार मेंआप केरोसिन तेल डालते हैं ? 

नहीं न l तो फिर पेट में मैगी, मंचुरियन अजीनो मोटो, बर्गर, पित्जा , नकली पनीर, घी , चीज़ , म्योनि, क्यों खाते हैं ?

-- डॉ विनोद मिश्र 

निम्न लिखित आलेख रूचि देवी का है l 

हाईवे पर किसी सस्ते ढाबे में खाना खाइये, menu में कम से कम 6 आइटम #पनीर के होंगे

5स्टार होटल में जाइये, #वेजीटेरियन सेक्शन में 60% डिशेज़ पनीर की होती है

30 रु में 6 पनीर मोमोज मिलते हैं?

50 रु में पनीर पिज़्ज़ा?

100 रु में बटर पनीर ?

40 रु मे पनीर कुलचा?

आज से 20 साल पहले भी जब मैं कहती थी कि मैं पनीर नही खाती तो लोग कहते थे इतनी हाई #प्रोटीन चीज़ नही खाती??

तब भी मुझे लगता था कि पनीर असली नही है

फिर मैं पनीर घर पर बनाने लगी मेरी माँ के लिए क्योंकि उन्हें पनीर पसंद है

मैं 70 रु में 1 लीटर #अमूल का full क्रीम दूध लेती हूँ जिसमे से करीब 200 ग्राम पनीर मिलता है

इस हिसाब से यदि 1किलो पनीर बनाना हो तो मुझे 5 लीटर दूध की आवश्यकता पड़ेगी जिसकी कीमत 350 रु होगी

यानी अगर असली #दूघ का पनीर बनाया जाए तो उसकी लागत कम से कम 350 रु तो होगी ही ,फुटकर रूप में

यदि ये मान लिया जाते कि दूध का फैक्ट्री मूल्य 50 रु प्रति लीटर भी हो तो भी 250 रु सिर्फ दूध की लागत होगी

अब यदि इसमें लेबर cost, गैस ,ईंधन जोड़ लिया जाए तो ये लागत 60 रु पहुंच जायेगी

अन यदि इसमें सप्लाई chain, लॉजिस्टिक भी जोड़ लिया जाए तो ये लागत 63 रु पहुंच जाती है

यानी कि कम से कम 315 रु का एक किलो पनीर

अब यदि कोई दुकानदार इसे 10% प्रॉफिट पर भी बेचे जो कि इससे कहीं ज्यादा पर बेचता है तो ग्राहक को ये लागत कम से कम 345 से 350 रु प्रति किलो पड़नी चाहिए

अब यदि आप कोई पनीर 200 रु किलो या 250 रु किलो के भाव से खरीदते हैं तो क्या दुकानदार ने दानखाता खोल रखा है जो लागत से भी 25% कम पर आपको पनीर बेचेगा?

असली पनीर की कीमत और मात्रा जाननी है तो घर पनीर बना कर देखिए अंदाज़ा हो जायेगा

फिर आता है एनालॉग पनीर ...यानी पनीर जैसा दिखने वाला और पनीर के टेक्सचर जैसा पदार्थ जिसके मूल इंग्रेडिएंट्स पाउडर का दूध, वनस्पति फैट, पाम आयल, अरारोट, स्टेबलाइजर और डेवलपिंग एजेंट्स होते हैं। अब चूंकि पाउडर मिल्क में फैट नही होता तो उसके लिए डालडा और पाम आयल मिलाया जाता है जिससे घनत्व बढ़ जाये। ये वही तेल हैं तो आर्टरी में जम जाते हैं । ये एनालॉग पनीर आपको बड़े बड़े 5 star होटल में भी मिलता है चाहे आप पनीर टिक्का खा रहे हों या पनीर दो प्याजा..

उससे भी निचली श्रेणी में आता है यूरिया ,डिटर्जेंट और मैदे के घोल से बना पनीर.. यानी वो पनीर जिसे आप 30 रु के 6 #मोमोज़ में स्वाद लेकर खाते है या फिर 50 रु में पनीर लोडेड #पिज़्ज़ा #बर्गर में खाते हैं

ये यूरिया सीधे आपकी किडनी और लीवर पर घात लगता है साथ ही लंबे समय तक खाने पर जानलेवा भी सिद्ध हो सकता है

भारत मे प्रति दिन दूध का उत्पादन 64 करोड़ लीटर होता है (२४० मिलियन टन ) {१ मिलियन = दस लाख } जिसमें से लगभग १४ करोड़ लीटर गाय भैस से प्राप्त होता है अर्थात ५० करोड़ लीटर दूध कहाँ से आ रहा है ?

यदि इस सारे दूध को फाड़कर यदि पनीर बना दिया जाए तो करीब 1 करोड़ 20 लाख किलो पनीर बन सकता है

लेकिन प्रति दिन पनीर की खपत करीब करीब 15000 टन है

क्या ये संभब है कि 1 करोड़ 50 लाख किलो पनीर 64 करोड़ लीटर दूध से बन पाए???

बाजार में मिलने वाला ९0% से भी ज्यादा पनीर नकली है

इसने रोड साइड से लेकर 5 स्टार होटल भी नकली पनीर खिला रहे हैं

क्या वजह है कि पिछले 30 सालों मे लीवर और किडनी की बीमारी में तेज़ी से इज़ाफ़ा हुआ है???

कभी जाकर देखिए छोटी छोटी गलियों के भीतर उबलते हुए उन भगोनों को जिनमे यूरिया उबल रहा है

जो लोग उसे बना रहे हैं उनसे कहिये की अपने बने पनीर को खाकर दिखाएं

कुछ दिन पहले एक पोस्ट पनीर पर लिखी थी औए कहा कि मैं पनीर नही खाती तो कुछ लोगों ने बवाल काट दिया l 

अगली बार जब आप किसी होटल में पनीर की डिश आर्डर करें तो कहिएगा एक टुकड़ा कच्चा पनीर लाकर आपको दिखाएं

शर्त लगा लो ..वो हज़ार बहाने बनाएंगे l 

लेखिका इसे आज़मा कर देख चुकी हैं l 

एक रेस्टोरेन्ट वाले ने तो ये भी कह दिया कि आपको खाना है तो खाओ वरना जाओ..लेकिन हम सैंपल नही दिखाएंगे

पनीर ही नही कमोबेश यही हाल मावे और मिठाइयों का है

एक किलो काजू की कीमत 1000 रु है । एक किलो काजू से एक किलो बर्फी नही बन सकती । उसमे यदि चीनी और मावा की मात्रा भी add कर दें तब भी ज्यादा से ज्यादा 600 ग्राम से ज्यादा dough नही निकल सकता । फिर आपको 1000 रु में काजू कतली कैसे मिल जाती है???

ये मावा भी उसी यूरिया ,डिटर्जेंट और अरारोट वाले दूध से बनता है जिसे बड़े बड़े शोरूम वालों से लेकर सड़क छाप हलवाई खरीदते हैं । फिर उसमें नाम मात्र का काजू डालकर बाकी मिठाई मूंगफली और कद्दू के बीज और मैदे से बनाई जाती है

#मिल्क_प्रोडक्ट सबसे बड़े scam हैं आज की तारिख़ में

दुर्भाग्य से सरकार भी कुछ नही कर पा रही

नकली प्रोडक्ट हर दिन पकड़े जाते हैं लेकिन हमारे कानून में उसके लिए कुछ जुर्माना या छोटी मोटी सज़ा होती है । उनसे होने वाली लाखों इनडाइरेक्ट मौतों का जिम्मेदार उन्हें नही माना जाता

सिर्फ एक ही उपाय है जागरूकता और इन्फॉर्मेशन शेयरिंग

वरना इंसान कीड़े मकोड़ों की तरह मरेंगे ओर कीड़े मकोड़े लंबे जिएंगे।

साभार

✍️रुचिनामा

Believe you will win... George Dantzig (1914-2005) Father of Linear Programming

 कोलंबिया विश्वविद्यालय में गणित के एक कोर्स के दौरान एक छात्र कक्षा में सो गया। जब उसकी नींद खुली, तो उसने देखा कि प्रोफेसर ने व्हाइटबोर्ड पर दो समस्याएँ लिखी थीं। उसने सोचा कि ये होमवर्क हैं, इसलिए वह उन्हें अपनी नोटबुक में नोट कर के घर ले गया।

जब उसने उन समस्याओं को हल करने की कोशिश की, तो वे उसे बेहद कठिन लगीं। लेकिन उसने हार नहीं मानी। घंटों लाइब्रेरी में बैठकर उसने संदर्भ पुस्तकों की मदद से अध्ययन किया और अंततः वह एक समस्या को हल करने में सफल हो गया, भले ही यह काफी चुनौतीपूर्ण था।

अगली कक्षा में प्रोफेसर ने जब होमवर्क के बारे में कुछ नहीं पूछा, तो वह चकित हुआ और खड़ा होकर पूछा, "सर, आपने पिछले लेक्चर में दिए गए असाइनमेंट के बारे में कुछ क्यों नहीं पूछा?"

प्रोफेसर ने उत्तर दिया, "असाइनमेंट? वो तो मैंने केवल ऐसे उदाहरण के तौर पर लिखी थीं जिन्हें अभी तक वैज्ञानिक हल नहीं कर पाए हैं।"

छात्र चौंक गया और बोला, "लेकिन मैंने उनमें से एक को हल कर लिया है! मैंने इस पर चार पेपर भी लिखे हैं।" उसकी इस उपलब्धि को बाद में मान्यता मिली और कोलंबिया विश्वविद्यालय में उसके लिखे चारों पेपर आज भी प्रदर्शित हैं।

George B Dantzig, 1914–2005 | Journal of the Operational ...         George Dantzig  (1914-2005) Father of Linear Programming

इस कहानी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि छात्र ने यह नहीं सुना था कि "इन समस्याओं का कोई हल नहीं है।" उसने सिर्फ यही माना कि ये कठिन प्रश्न हैं, जिन्हें हल करना ज़रूरी है, और उसने पूरे मन से उन्हें हल करने की कोशिश की – और सफल हुआ।

यह कहानी हमें याद दिलाती है – उन लोगों की बात मत सुनो जो कहते हैं कि तुम कुछ नहीं कर सकते। आज की पीढ़ी अक्सर निराशा और नकारात्मकता से घिरी होती है। कुछ लोग जानबूझकर दूसरों के भीतर असफलता और हार का बीज बोते हैं।

लेकिन तुम्हारे पास अपनी मंज़िल पाने की ताकत है, बाधाओं को पार करने की शक्ति है, और अपने सपनों को साकार करने का साहस है। बस खुद पर और ईश्वर पर विश्वास रखो – और लगातार प्रयास करते रहो।

इस छात्र का नाम था जॉर्ज डैंटज़िग, और यह समस्या Math Stack Exchange से ली गई थी।

"डैंटज़िग ने यह सिद्ध किया कि Student’s t-test के संदर्भ में, एकमात्र तरीका जिससे हम ऐसी hypothesis testing बना सकते हैं जो standard deviation से स्वतंत्र हो, वह है एक निरर्थक परीक्षण, जो हमेशा समान संभावना से रिजेक्ट या एक्सेप्ट करता है – जो व्यावहारिक नहीं है।"