Sunday, 30 November 2025

मंदिर , देव द्वारा , देवरा , को संरक्षित कीजिये l पुजारी का सम्मान कीजिये

 आप किसी भी जाति, वर्ण के हों, आपके गाँव में आपके कुल देवता/ग्राम देवता की डीह होगी। मन्दिर न हो तो कम से कम देवस्थान अवश्य होगा। पहले वहाँ आपकी ही जाति के पुजारी, भगत आदि होते थे। पता कीजियेगा, क्या अब भी वहाँ कोई भगत है? तनिक याद कीजिये, वहाँ अंतिम बार आपके घर से कब भोग चढ़ाया गया था? सम्भव है वर्षों बीत गए हों। सम्भव है आपको वहाँ गए दसियों वर्ष बीत गए हों। यह भी सम्भव है कि आपको इसके सम्बंध में कोई जानकारी ही न हो। है न?

गाँव में मन्दिर के निर्माण के लिए चंदा लगता है तो हम सभी अपने सामर्थ्य अनुसार दान करते हैं। मन्दिर में किसी आयोजन के लिए भी चंदा दिया जाता है। पर याद कीजिये, मन्दिर में रोज लगाए जाने वाले भोग के लिए आपने अंतिम बार कब पैसे दिए थे? याद है?

आपको पता भी है कि आपके गाँव वाले मन्दिर के पुजारी को कोई वेतन भी दिया जाता है या नहीं? आपने अंतिम बार उन साधु-पुजारी को कब पैसे दिए थे?

शहर के मंदिरों की दशा लगभग ठिक है, पर गाँव के अधिकांश मन्दिर अब धीरे धीरे खाली होते जा रहे हैं। पहले साधू होते थे और वे निःस्वार्थ भाव से मन्दिर की सेवा करते थे। हम दो हमारा एक वाले समय में अब कौन बन रहा है साधु? तो मंदिरों की व्यवस्था के लिए अब साधु के स्थान पर पुजारी रखना पड़ रहा है। पर अधिकांश ग्रामीण मंदिरों में इतनी भी आय नहीं कि ठिक से भोग लग सके। पुजारी का वेतन तो भूल जाइए। रख रखाव और दैनिक खर्च का जुगाड़ करना कठिन हो रहा है। अब सोचिये! इनका ध्यान कौन रखेगा?

तनिक घूम कर देखेंगे तो पाएंगे कि ग्रामीण क्षेत्र के असंख्य मंदिरों में कोई पुजारी तक नहीं है। कौन करेगा? हमारे आपके पास समय है नहीं। ब्राह्मणों ने पिछले साठ सत्तर साल में इतनी गाली सुन ली कि अब कोई पुरोहिती करना नहीं चाहता, मन्दिर पर रहने को तो भूल ही चाहिए। पुजारी बनने का अधिकार मांगने वाले केवल फेसबुक पर बोलते हैं, उन्हें पुजारी बनना नहीं है। बनना होता तो लाखों मन्दिर खाली है, कहीं चले जाते...

जो लोग मूल गाँव छोड़ कर शहरों में बस गए उनसे उनके कुलदेवता की डीह छूटी, ग्राम देवता छूटे, काली-माई, बरम बाबा छूटे। उन देव स्थानों की ओर कभी मुड़ कर देखने का भी समय नहीं, और हमें लगता है कि हम जगे हुए हिन्दू हैं।

जितना मैं समझ पा रहा हूँ, श्रद्धा से अपने गाँव के मन्दिर पर जा कर घण्टे भर बैठने से अच्छी तीर्थयात्रा कोई नहीं। यदि आप उस छोटे मन्दिर की व्यवस्था सुधारने में अपना योगदान दे रहे हैं तो जैसे बहुत बड़ा यज्ञ कर रहे हैं। महीने में एक बार भी मन्दिर का भोग अगर हमारे पैसे से होने लगे तो हम स्वयं को जगा हुआ हिन्दू कह सकते हैं। अपने गाँव जवार के किसी जीर्ण मन्दिर का उद्धार करा दिए, किसी ग्रामदेवता की डीह पर पूजा की परम्परा शुरू करा दिए तो वही बदरी केदार है भाई साहब!

ढोल गाँव के मन्दिर पर भी बजना चाहिये महाराज! ईश्वर वहाँ भी हैं।

Thursday, 27 November 2025

कालभोज - बाप्पा रावल

 है कोई फ़िल्म निर्माता जो इस विषय पर फ़िल्म बनाये।

यदि बन गई तो वह अब तक की सबसे अधिक कमाई वाली फिल्म बनेगी

क्योंकि यह एक बिल्कुल ही प्रासंगिक विषय है।

◆|कालभोज◆

एक राजपूत बालक की गाय रोज दूध दुहने के समय कहीं चली जाती थी। उस बालक को रोज भूखा रहना पड़ता था इसलिए एक दिन वो उस गाय के पीछे पीछे गया। गाय एक ऋषि के आश्रम में पहुंची और एक शिवलिंग पर अपने दूध से अभिषेक करने लगी। बालक को बड़ा आश्चर्य हुआ ये क्या चक्कर है तभी उसने देखा उसके पीछे एक ऋषि खड़े मुस्कुरा रहे है। ऋषि का नाम था "हारीत ऋषि"।

उन्होंने उस बालक को शिक्षा दीक्षा दी और उनके आशीर्वाद से उन्होंने 734 ईस्वी में मनमोरी नामक मौर्य सम्राट को चितौड़ में हराकर अपनी शाख बढ़ाई।

इस बालक का नाम था "कालभोज" जिसे सब बप्पा रावल के नाम से जानते थे, हरित ऋषि के आशीर्वाद से बप्पा महादेव के बहुत बड़े भक्त हुए। उनकी धर्म मे इतनी रुचि थी कि जहां भी धर्म पर आघात होते वही पर बप्पा का कहर टूटता और उस जगह को पुनः सनातन में मिला कर भगवा लहराते। आठ फीट से अधिक उचाई वाले  काल भोज के नाम पर ही रावलपिंडी नाम पडा .

712 ईस्वी में जब मोहम्मद क़ासिम ने राजा दाहिर को छल से मार दिया तो उसने सिंध में इस्लाम की सत्ता लहरा दी, मगर ये ज्यादा दिन तक नही रहा। बप्पा रावल उनपर रुद्र बनके टूटे और मुहम्मद कासिम को उस समय के ख़लीफ़ा ने वापस बुलाया, बुलाया क्या मुहम्मद क़ासिम को भागना पड़ा।

मगर इस्लाम के शासकों को चैन कहाँ था उन्होंने दो तरफ से मेवाड़ पर हमला बोला। अबकी बार बप्पा रावल ने कहर मचा दिया उन्होंने ऐसी मारकाट मचाई की इस्लाम के इन आक्रमणकारियों ने इतिहास में भी कभी नही सुनी थी। दूसरी तरफ से गुर्जर प्रतिहार वंश के नागभट्ट प्रथम ने उनको दक्षिण पश्चिमी राजस्थान की तरफ से दौड़ा दौड़ा कर मारा।

फिर बप्पा रावल ने एक ऐसा काम किया कि अगले 400 साल तक अरब और इस्लामी शासकों ने भारत की तरफ मुंह उठाकर भी नही देखा। उन्होंने छोटे मोटे सरदारों और नागभट्ट प्रथम व विक्रमादित्य द्वितीय के साथ मिलकर एक हिन्दू सेना का निर्माण किया। इस सेना ने अरब के अल हकम बिन अलावा, तामिम बिन जैद अल उतबी, अब्दुलरहमान अल मूरी की ऐसी खटिया खड़ी की कि इस्लामी शासक बप्पा रावल के नाम से भी थर थर कांपने लगे।

बप्पा यही नही रुके उन्होंने गजनी के शासक सलीम को बुरी तरह हराया, और अपने भतीजे को वहां की गद्दी पर बिठा आये। अरबी शासकों ने गजवा- ए - हिन्द के सपने को सपना ही मान लिया। गांधार, तुरान, खुरासान और ईरान तक अपनी सत्ता का परचम लहराया और वहां भगवा राज कायम किया। उनके डर से 35 मुस्लिम शासकों ने अपनी लड़कियों का ब्याह उनसे कर दिया था।

713 ईस्वी में जन्मे बप्पा रावल ने लगभग 19- 20 साल शासन के बाद सन्यास ले लिया। 97 वर्ष की आयु में उन्होंने इस संसार को त्याग दिया। उनके चलाये सिक्के पर नन्दी व शिवलिंग का चित्र था और त्रिशूल के साथ पुरुष आकृति। आज भी भारत के समग्र इतिहास में यदि हम खोजे तो ऐसा कोई योद्धा नही मिलता जिसने इस्लाम शासकों को इस तरह घुटनों के बल लाया हो कि वे 400 साल तक उस बप्पा के कहर के डर से भारत की तरफ आंख उठा कर भी नही देख पाए हो।

बप्पा रावल के नाम से बसा रावलपिंडी आज भी पाकिस्तान की छाती पर खड़ा दुश्मनों को उनकी औकात दिखा रहा है

समय मिले तो अपने असली इतिहास को ज़रूर पड़े

झूठे इतिहास सिर्फ़ कांग्रेस और वामियो की देन है

Tuesday, 18 November 2025

तुम्हारी आदतें बता देती हैं कि बैंक अकाउंट में कितना होगा!

With Thanks to Raj Gupta for this article

 "तुम्हारी आदतें बता देती हैं कि बैंक अकाउंट में कितना होगा!" — जानिए कौन-सी आदतें बनाती हैं अमीर और कौन-सी रखती हैं कंगाल….!

कभी किसी को देखकर मन में आया है —
“इसका बैंक अकाउंट तो तगड़ा होगा!”
असल में, 
पैसे का स्तर हमारी सैलरी नहीं, हमारी आदतें तय करती हैं।

आप रोज़ कितना कमाते हैं, उससे ज़्यादा मायने रखता है कि आप रोज़ क्या करते हैं
तो चलिए जानते हैं, आपकी कौन-सी छोटी-छोटी आदतें तय करती हैं कि आपका बैंक बैलेंस हमेशा भरा रहेगा या महीने के आखिर में जीरो हो जाएगा।


🧠 1. “हर महीने बचाने की आदत बनाम खर्च करने की मजबूरी”

👉 अगर आप सैलरी मिलते ही EMI, पार्टी, या ऑनलाइन शॉपिंग में सब उड़ा देते हैं — तो आपका बैंक अकाउंट महीने के आखिर में खाली ही रहेगा।
👉 लेकिन अगर आप पहले 20% बचा कर रखते हैं और बाकी खर्च करते हैं — तो धीरे-धीरे अमीरी की आदत बनती है।

स्मार्ट मूव:
हर महीने ऑटो-डेबिट लगाएँ ताकि आपकी इनकम से पहले ही सेविंग कट जाए।

☕ 2. “छोटी चीज़ों में बड़ा पैसा उड़ाना”

एक Starbucks कॉफी ₹300, Zomato ऑर्डर ₹400, Movie Ticket ₹350...
और फिर कहते हैं — “पता नहीं पैसा कहाँ चला गया!”

ये micro-spends ही धीरे-धीरे बैंक अकाउंट को खाली करते हैं।
वहीं जिनकी आदत है खर्च लिखने की — वो जानबूझकर सोचते हैं, 
"क्या ये चीज़ वाकई ज़रूरी है?"

💡 स्मार्ट हैक: रोज़ के खर्च ट्रैक करें।
🔗 
Money Tracker Diary

सिर्फ 10 दिन तक ट्रैक करिए, आपको खुद पता चलेगा कि पैसा कहाँ उड़ रहा है।


🕒 3. “Time Invest करने वाले बनाम Time Waste करने वाले”

पैसेवाले लोग अपने टाइम को Asset की तरह इस्तेमाल करते हैं।
वे सोशल मीडिया पर स्क्रॉल नहीं, 
Skill Build या Learning Invest करते हैं।

जिनकी आदत है रोज़ कुछ नया सीखने की — वो आगे जाकर पैसे की नई-नई Source बना लेते हैं।

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(यहाँ से आप Data Skills सीखकर ₹60,000+ तक की Extra Income बना सकते हैं।)


📱 4. “Social Media vs Smart Media”

90% लोग सोशल मीडिया सिर्फ स्क्रॉल करने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
लेकिन 10% लोग वही प्लेटफॉर्म 
Income Source बना लेते हैं —
Facebook Reels, YouTube Shorts, Quora Writing या Instagram Blogging से।

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(आप भी अपनी राय और जानकारी शेयर करके हर महीने ₹5,000-₹25,000 कमा सकते हैं।)

आदत सिर्फ फर्क लाती है — कोई कंटेंट खाता है, कोई कंटेंट बनाता है।


💳 5. “Credit Card से Lifestyle या Trap?”

Credit Card अगर सही तरीके से इस्तेमाल हो तो Financial Freedom देता है,
गलत तरीके से इस्तेमाल हो तो Debt Trap।

  • Cashbacks, EMI-less offers = Smart Use
  • Minimum Due Payment, Impulse Shopping = Bad Habit

💳 Axis MyZone Credit Card Store

(Smart Card, Real Rewards — कोई hidden charges नहीं)


🏠 6. “घर चलाने वाले और खर्च गिनने वाले में फर्क”

अमीर लोग हर महीने Expense Sheet बनाते हैं।
वे जानते हैं, किस चीज़ पर कितना जा रहा है।
जो सिर्फ खर्च करते हैं बिना गिने — वो हमेशा तंगी में रहते हैं।


💡 7. “Invest करने की हिम्मत बनाम डर में जीना”

पैसेवालों की एक बड़ी आदत — वे अपने पैसे को काम पर लगाते हैं
जो लोग SIP, Mutual Fund या P2P Investment में धीरे-धीरे पैसा लगाते हैं,
वो Compound Interest का फायदा उठाते हैं।

💸 Start SIP Angel One

(Free Account खोलें और SIP शुरू करें – No Brokerage)

वहीं जो लोग “Risk से डरते हैं”, उनके पैसे महंगाई खा जाती है।


🔁 8. “Consistency – अमीरी की असली पहचान”

सफल लोग एक दिन में अमीर नहीं बनते, बल्कि रोज़ छोटी-छोटी अच्छी आदतें दोहराते हैं —
हर दिन थोड़ा बचाना, थोड़ा सीखना, थोड़ा प्लान करना।

अगर आप हर दिन सिर्फ ₹200 बचाते हैं, तो साल के आखिर में ₹73,000 आपके पास होंगे —
और यही छोटी-छोटी consistency अमीरी का बीज है।

📘 Atomic Habits Book In Hindi


🔚 निष्कर्ष — “आदतें बदलो, हालत खुद बदल जाएगी!”

आपका बैंक अकाउंट आपके Character का आईना है।
कोई भी बड़ी अमीरी किसी Jackpot से नहीं आती —
वो आती है आपकी रोज़मर्रा की समझदारी, Planning और आदतों से।

👉 इसलिए अगली बार जब आप किसी चीज़ पर खर्च करें, सोचिए —
“क्या यह मेरी हैबिट बैंक बैलेंस बढ़ा रही है या घटा रही है?”

✍️ Written by Raj Gupta

Monday, 17 November 2025

आप हर साल एक लाख रुपे गवां देते हैं !! Every Middle class Looses

 कैसे भारतीय मिडिल क्लास हर 5 साल में बिना जाने ₹5 लाख गंवा देते है!

(एक सच जिसे जानकर आप सोच में पड़ जाओगे)

क्या आपको पता है कि भारतीय मिडिल क्लास हर 5 साल में लगभग ₹5 लाख रुपये गंवा देती है — बिना ये जाने कि पैसा जा कहां रहा है?
ये कोई फ्रॉड या स्कैम नहीं है — ये आपकी ही कुछ छोटी-छोटी आदतें हैं जो धीरे-धीरे आपकी जेब खाली करती हैं।


🧾 1. EMI का जाल – “Zero Down Payment” की कीमत

हर मिडिल क्लास व्यक्ति किसी ना किसी EMI में फंसा होता है — मोबाइल, बाइक, कार या क्रेडिट कार्ड का।
मान लीजिए हर महीने ₹6,000 की EMI है, जो 5 साल में ₹3.6 लाख बन जाती है।
अब सोचिए — अगर यही पैसा किसी 
SIP (Systematic Investment Plan) में 12% रिटर्न के साथ लगाते, तो 5 साल में वो ₹4.3 लाख होता।
👉 यानी आपने 
₹70,000 का नुकसान सिर्फ खर्च करने की आदत से किया।

💡 समाधान:
हर EMI से पहले एक “Self EMI” बनाइए — पहले अपने लिए सेविंग कीजिए, फिर बाकी खर्च कीजिए।
📈 Recommended 
Amazon.in: Sip Journal


🛒 2. “Offers” का Trap – Discount नहीं, Distraction है

Flipkart, Amazon और Swiggy जैसी कंपनियाँ “Festive Sale” के नाम पर आपकी psychology खेलती हैं।
आप सोचते हैं आप बचत कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में आप वो खरीद रहे हैं जिसकी ज़रूरत नहीं है।
औसतन एक मिडिल क्लास फैमिली हर साल 
₹20,000-₹25,000 सिर्फ offers में बर्बाद कर देती है।

💡 समाधान:
हर online order से पहले खुद से पूछें — 
“अगर आज offer न होता, तो क्या मैं ये लेता?”
अगर जवाब “नहीं” है, तो वो खर्च नुकसान है।

write everything on journal : Amazon.in: Sip Journal


📉 3. बैंक में पैसा पड़ा रहना – “Silent Loss”

ज्यादातर लोग अपना पैसा saving account में रखते हैं जहां interest सिर्फ 2.5%–3.5% है, जबकि inflation 6% से ऊपर है।
इसका मतलब — हर साल आपका पैसा value खो रहा है।

💡 समाधान:
पैसे को 
short-term debt funds या liquid mutual funds में रखिए जहां 6–7% तक रिटर्न मिलता है।

👉 Example: Think And Grow Rich In Hindi


🚬 4. Unplanned Lifestyle & No Tracking

कई middle-class लोग अपने खर्च track नहीं करते।
हर महीने 500–1000 रुपये बिना ध्यान दिए “चाय, स्नैक्स, online subs” में उड़ जाते हैं।
5 साल में यही बन जाता है 
₹60,000–₹70,000।

💡 समाधान:
Expense tracker app लगाइए जैसे 
Journaling Diary

हर हफ्ते review करें कि कहाँ leak हो रहा है।


🧠 5. Financial Education की कमी

सबसे बड़ा नुकसान पैसे का नहीं, ज्ञान का होता है।
Middle-class लोग पैसे कमाते हैं, लेकिन उन्हें बढ़ाने की skill नहीं सीखते।
Investing, tax-saving, side income — इन सब चीज़ों को न जानना ही 5 साल में लाखों का नुकसान करा देता है।

💡 समाधान:
हर हफ्ते 30 मिनट finance सीखने में लगाइए।
YouTube चैनल जैसे 
Pranjal KamraCA Rachana Ranade और ब्लॉग जैसे Raj Gupta I Global insights को follow करें।

💬 निष्कर्ष:

मिडिल क्लास लोग इसलिए नहीं पिछड़ते क्योंकि वो मेहनत नहीं करते,
बल्कि इसलिए क्योंकि वो अपने पैसे को 
direction नहीं देते।

👉 अगर आप भी अपने ₹5 लाख बचाना चाहते हैं, तो आज से शुरू कीजिए —
एक SIP, एक Skill और एक Smart Decision।

How to make money Step 2

Thanks to Abhishek Mishra for such insight 

1. आप किसी भीड़ का हिस्सा नहीं हैं…

आप वो इंसान हैं जिसे अंदर से लगता है —
“मेरी ज़िंदगी का असली इस्तेमाल अभी तक हुआ ही नहीं।”
लेकिन फिर होता क्या है?
दौड़-धूप, नौकरी, बिल, परिवार, तनाव… और आपका असली सपना धीरे-धीरे 
“कभी तो करूंगा” की फाइल में दब जाता है।

लेकिन अब वक़्त है साफ़-साफ़ समझने का —
अगर आप अपनी सोच नहीं बदलते, तो किस्मत भी नहीं बदलती।


2. अमीर लोग आपसे ज्यादा होशियार नहीं, बस ज्यादा रणनीतिक होते हैं

जहाँ हम सोचते हैं — “जब ज्यादा पैसे होंगे, तब निवेश करूंगा”
वो सोचते हैं — 
“निवेश करूंगा, तभी ज्यादा पैसे होंगे”

हम कमाते हैं → खर्च करते हैं → बचत बचती है तो ठीक
वो कमाते हैं → निवेश करते हैं → खर्च उतना जो ज़रूरी हो

हम कहते हैं “पैसे बच नहीं रहे”
वो कहते हैं “पैसे कहाँ लगा सकते हैं?”

बस फर्क इतना है — हम पैसे के पीछे भागते हैं, वो पैसे को अपने पीछे दौड़ाते हैं।

अब सवाल आपके लिए —
क्या आप भी उसी दौड़ में दौड़ते रहेंगे, या अपनी खुद की रेस बनाएंगे?


3. पहला लेवल – कमाई को मजबूरी नहीं, गेम बनाइए

अब कमाने का सिर्फ एक ही तरीका नहीं रहा — नौकरी।
अब 
स्किल ही असली करेंसी है, और इंटरनेट आपका सबसे बड़ा हथियार।

  • एक स्किल सीखिए, और 9–5 की गुलामी से बाहर निकलिए
  • Freelancing से कमाइए — बिना ऑफिस, बिना बॉस
  • YouTube, Quora, ब्लॉग, Twitter – ये सब नई उम्र की “प्रिंटिंग मशीन” हैं
  • Affiliate – सबसे आसान और शांत बिज़नेस, जहाँ प्रोडक्ट आपका नहीं, कमाई आपकी

अब खुद से पूछिए —
क्या आप 4 घंटे इंस्टाग्राम पर बिता सकते हैं?
तो 1 घंटा खुद पर क्यों नहीं?


4. दूसरा लेवल – सेविंग कंजूसी नहीं है, ये पावर है

जब भी पैसे खर्च करने का मन हो, ये एक लाइन याद रखिए —
“मैं पैसे से प्यार करता हूँ, लेकिन पैसों का गुलाम नहीं बनूँगा।”

  • खर्च से पहले बचत कीजिए, बचत के बाद खर्च
  • हर खरीदारी से पहले 5 सेकंड सोचिए — ज़रूरत या सिर्फ भावनाएं?
  • दिखावे के मुकाबले सुकून को प्राथमिकता दीजिए
  • और हाँ — खुद पर खर्च करने में कभी शर्म मत करिए, बस सोच-समझकर करिए

अब धीरे-धीरे आपका पैसा आपकी ताकत बनना शुरू करेगा।


5. तीसरा लेवल – पैसा बढ़ाए बिना अमीरी सिर्फ कल्पना है

बचत का असली मकसद उसे बढ़ाना होता है।
पैसा अगर सो रहा है — तो पूरा सिस्टम आपके खिलाफ काम कर रहा है।

  • SIP – छोटा-छोटा, लेकिन दीर्घकालिक प्रभाव
  • Index Funds – कम दिमाग, लंबा मुनाफा
  • शेयर बाज़ार – डरें नहीं, सीखें
  • Compounding – दुनिया की सबसे शांत और सबसे खतरनाक सुपरपावर

आज ₹1000 जो लगा रहे हैं, वो 5 साल बाद ₹3000–5000 बन सकता है।
और यही असली खेल है — पैसा समय के साथ गुणा हो।


6. कुछ कड़वी लेकिन ज़रूरी बातें…

  • महीने में एक छोटी जीत ज़रूर हासिल करें
  • इनकम का सिस्टम बनाइए — 60% ज़रूरत, 20% सेविंग, 20% ग्रोथ
  • अपनी इनकम का एक लक्ष्य बनाइए — “ये मेरे भविष्य की आज़ादी है”
  • Comparison छोड़िए — आपकी लड़ाई सिर्फ आपके कल से है, किसी और से नहीं

7. और अब... खेल शुरू होता है

आपने बहुत लोगों को कहते सुना होगा — “मेरे पास टाइम नहीं है”
लेकिन सच्चाई ये है
टाइम सबके पास बराबर है। फर्क बस इतना है कि कौन उसका मालिक बनता है और कौन उसका गुलाम।

अगर आप यहाँ तक पढ़ चुके हैं
तो यकीन मानिए, आप भीड़ वाले इंसान नहीं हैं।
आप वो हैं जिसे असल में अपने पैसे से आज़ादी चाहिए, न कि सिर्फ सैलेरी।

अब सिर्फ एक वादा करिए
“मैं अपने पैसे का मालिक बनूँगा, और उसे अपने लिए काम करवाऊँगा।”

अगर ये पोस्ट आपको थोड़ी भी आग दे गई हो …
तो इसे किसी ऐसे इंसान को भेजिए जो अभी तक “पैसा नहीं बच रहा” का मंत्र जप रहा है।
क्योंकि एक इंसान की सोच बदले,
तो पूरे परिवार की किस्मत बदल सकती है।

और हाँ — आज से ही शुरू करो। सही वक्त कभी नहीं आता… सही निर्णय आपको वक्त से आगे भेज देता है।

Saturday, 15 November 2025

क्या आप इस दानवीर को जानते हैं ? नहीं ! तो देखिये ..

 यह लेख तमिल क्वोरा से लिया गया है। इसे हिंदी में अनुवादित किया गया है। सभी प्रशंसाएँ मूल लेखक को जाती हैं।

चेन्नई के सोलीगनल्लूर गांधीनगर एरिकराई क्षेत्र में सुरियाकला नाम की एक महिला ने मुझसे मदद मांगने के लिए संपर्क किया।

उसने बताया कि उसे पति ने उसे छोड़ दिया है। अपने दो बच्चों के साथ वह एक किराए के घर में रहती है, जिसके लिए वह हर महीने 1200 रुपये किराया देती है। पहले वह घरेलू सहायिका का काम करती थी लेकिन अब वह बेरोजगार है।

उसने कहा, अगर मुझे एक सिलाई मशीन मिल जाती तो मैं जीविका कमा लेती। मैं ब्लाउज सिलना जानती हूं।

मैं पहले से ही इस महिला के माता-पिता को जानता था। वे सिंधथ्रीपेट्टई में रहते थे। वह एक बहुत ही गरीब परिवार था। इसलिए मैंने सोचा कि परिवार की मदद करने के लिए सिलाई मशीन खरीदना एक अच्छा विचार होगा। मैंने इस जानकारी को अपने दोस्तों और दयालु लोगों के व्हाट्सएप समूहों में साझा किया।

जल्द ही मुझे मदुरै में रहने वाले एक हितैषी का फोन आया।

उसने मुझसे पूछा, क्या यह परिवार वास्तव में इस मदद का हकदार है? मैंने उन्हें बताया कि वे 100% हकदार हैं, तो उसने मुझसे सिलाई मशीन की कीमत पूछी। मैंने एक दुकान पर पूछताछ की और उन्हें बताया कि कीमत 18,000 रुपये है। उसने तुरंत मुझसे अपने बैंक खाते के विवरण मांगे। लेकिन मैंने उसे बताया, कृपया सीधे सिलाई मशीन बेचने वाली दुकान में पैसे भेजें, और मैंने दुकान के विवरण उसके साथ साझा किए। उसने दुकान में राशि ट्रांसफर कर दी।

मैंने एक ऑटो किराए पर लिया, 45 दिनों के लिए किराने का सामान खरीदा। समान, मशीन और आवश्यक धागे, बटन और हुक के साथ, मैं सब कुछ देने के लिए सोलीगनल्लूर गया।

परिवार ने कभी भी इतनी जल्दी मदद की उम्मीद नहीं की थी। मैंने तुरंत महिला से कहा कि वह सिलाई मशीन पर बैठकर कुछ सिलाई करे, फिर मैंने अपने मदुरै के दोस्त को वीडियो कॉल पर दिखाया।

लेकिन जैसे ही मैंने उसे वीडियो पर देखा, मैं हैरान रह गया। मैंने कल्पना की थी कि वह एक मध्यम आयु वर्ग का कोई अधिकारी या व्यवसायी होगा। लेकिन वहां केवल 25 वर्ष एक युवा अपनी चाय बेचने वाली साइकिल और केतली के साथ खड़ा था। एक युवक जो सड़कों पर चाय बेचता है।

मैंने उसके पीछे देखा, सोचते हुए कि कोई मास्टर या नियोक्ता होगा जिसने उसे भेजा होगा। किसने हमारी मदद की? मैंने पूछा। मैंने, उसने कहा।

उसके बाद ही मुझे उसकी पूरी कहानी पता चली। उसका नाम तमिलराजन है। उसने अपने माता-पिता को बहुत कम उम्र में खो दिया था। वह काम की तलाश में चेन्नई आया, उसने अत्यधिक कठिनाइयों का सामना किया, भूख का दर्द अनुभव किया, और बाद में मदुरै लौट आया, जहां वह अब एक साइकिल पर चाय बेचता है। अपनी कम दैनिक आय से वह हर दिन 20 से 30 गरीब लोगों के लिए भोजन खरीदता है। भूखे को भोजन कराता है और समाज के लिए एक असाधारण सेवा करता है।

How to make money ! 6 Mionth plan

Thanks to Raj Gupta 

 “6 महीने के लिए गायब हो जाओ, इन 7 पैसों की आदतों पर काम करो, और तुम 99% भारतीयों से आगे निकल जाओगे।

आइए जानते हैं वो 7 Money Habits जो हर मिडिल-क्लास इंसान को सीखनी चाहिए 👇


🧠 1. अपने खर्चों को ट्रैक करना शुरू करो

ज्यादातर लोग नहीं जानते कि उनका पैसा कहां चला जाता है।
हर महीने ₹1,000–₹2,000 ऐसे ही “गायब” हो जाते हैं।
📱 कोई Expense Tracker App (जैसे Walnut या Money Manager) रखो और हर खर्च नोट करो।
👉 पहला कदम है 
“Money Awareness”

Note Book 200 Pages: Books


💳 2. पहले बचत करो, बाद में खर्च करो

भारतीयों की सबसे बड़ी गलती है — “जो बचा, वही बचत।”
CA का कहना है —

“Income – Savings = Expenses”
न कि
“Income – Expenses = Savings”
हर महीने सैलरी आते ही 20% हिस्सा SIP, FD या Emergency Fund में डालो।
बाकी पैसों से ही खर्च चलाओ।


📚 3. फाइनेंशियल एजुकेशन में इन्वेस्ट करो

स्कूल हमें गणित सिखाता है, लेकिन पैसे का गणित नहीं।
हर महीने कुछ समय YouTube, Quora या किताबों में लगाओ —
जैसे 
Rich Dad Poor Dad

Rich Dad Poor Dad Book In Hindi 25Th Anniversary Edition Book, New1

The Psychology of Money

The Psychology Of Money Book Hindi: Books

जितना ज्यादा सीखोगे, उतना पैसा तुम्हारे लिए काम करेगा।


📈 4. “Multiple Income Sources” बनाओ

सिर्फ सैलरी से अमीर कोई नहीं बनता।
CA की सलाह —

“एक इनकम से जिंदगी चलती है,
लेकिन कई इनकम से आज़ादी मिलती है।”
फ्रीलांसिंग, ब्लॉगिंग, डिजिटल प्रोडक्ट, एफिलिएट मार्केटिंग या छोटा ऑनलाइन बिज़नेस — कुछ भी शुरू करो।
छोटा शुरू करो, बड़ा सोचो।


🧾 5. Tax और Insurance को समझो

भारतीय मिडिल क्लास की आधी कमाई टैक्स और मेडिकल खर्चों में चली जाती है।
लेकिन अगर आप सही प्लान बनाओ तो आप हजारों रुपये बचा सकते हो।

  • ELSS या PPF में निवेश करो (सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचत)
  • Health Insurance लो — ताकि मेडिकल इमरजेंसी में सेविंग न टूटे

🧘‍♂️ 6. Lifestyle Inflation से बचो

सैलरी बढ़ते ही खर्च बढ़ाना बंद करो।
नया फोन, नया बाइक, नया EMI — यही सबसे बड़ा जाल है।
हर बार जब इनकम बढ़े, तो कम से कम 50% हिस्सा निवेश बढ़ाओ, खर्च नहीं।


🚀 7. धैर्य रखो और Consistency बनाए रखो

“6 महीने गायब हो जाओ” का मतलब है —
Parties, Netflix, और बेवजह स्क्रॉलिंग छोड़कर खुद में इन्वेस्ट करो।
पहले 6 महीने मुश्किल लगेंगे, लेकिन उसके बाद
💸 पैसे की समझ,
🧠 आत्मविश्वास,
और 💪 फ्रीडम — सब कुछ मिलेगा।


🏁 निष्कर्ष:

भारत में 80% लोग सिर्फ सैलरी के भरोसे हैं।
लेकिन जो 7 हैबिट ऊपर लिखी हैं, वो आपको उस 20% में ला सकती हैं —
जहां लोग 
पैसे के लिए नहीं, बल्कि पैसा उनके लिए काम करता है।

तो अगर आप वाकई में “मालामाल” बनना चाहते हैं —
👉 अगले 6 महीने के लिए गायब हो जाओ
👉 और इन 7 मनी हैबिट्स को अपनी जिंदगी में उतारो।

परिणाम?
6 महीने बाद लोग पूछेंगे — “भाई, तू बदल गया है!”
और आप मुस्कुराओगे — क्योंकि आपको पता होगा 
क्यों। 💼✨

✍️ Raj Gupta "सही सोच से ही सही भविष्य बनता है"

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