आज गणेश शंकर विद्यार्थी जी का पुण्यतिथि है गणेश शंकर विद्यार्थी जीवन पंथी विचारधारा के थे और मुसलमानों को अपना भाई मानते थे अपने अखबार दैनिक प्रताप में भी वह अक्सर हिंदू मुस्लिम भाईचारा की बातें लिखते थे
भगत सिंह की फांसी के अगले दिन कानपुर में सार्वजनिक हड़ताल का आयोजन किया गया था।
लेकिन मुसलमानों ने अपनी दुकाने बंद करने से इंकार कर दिया।
जिसके बाद पूरे शहर में दंगा भड़क गया था।
इस दंगे के दौरान गणेश शंकर विद्यार्थी मुस्लिम इलाकों में घूम कर मुसलमानो की जान बचाते रहे एक बुजुर्ग मुसलमान जिसकी उन्होंने जान बचाई उसने उनके हाथ भी चूमे
फिर उन्हें जब सूचना मिली कि एक मुस्लिम मोहल्ले में कुछ हिंदू बंधक है तो गणेश शंकर विद्यार्थी जो पूरी जिंदगी मुसलमान को अपना हमदर्द समझते रहे वह जब मुस्लिम इलाके में गए तब उनका ब्रह्म इस कत्ल कर दिया गया और उनकी लाश फेंक दी गई
दो दिन के बाद 25 मार्च 1931 को उनकी छत विछत लाश मिली
और इसी दंगे के दौरान 25 मार्च 1931 को महान पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी को मुस्लिम दंगाईयों की भीड़ ने बड़ी बेरहमी से कत्ल कर डाला था।
हर छोटी-बड़ी मॉबलिंचिंग पर छाती पीटने वाले लिबरल-लुटियन पत्रकार इस शहादत पर चुप क्यों हो जाते हैं। वो क्यों नहीं बताते कि विद्यार्थी मुस्लिम मॉबलिंचिंग के शिकार थे।
आज #गणेश_शंकर_विद्यार्थी की पुण्यतिथि है। सादर श्रद्धांजलि।
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