Sunday, 10 November 2024

आसमानी किताब का सच l गैर इस्लाम को क़त्ल करो

 * फिर, जब पवित्र महीने बीत जाऐं, तो ‘मुश्रिकों’ (मूर्तिपूजकों) को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल (हत्या - विकिपीडिया) करो, और पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घात की जगह उनकी ताक में बैठो। (कुरान मजीद, सूरा 9, आयत 5)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* जिन लोगों ने हमारी ”आयतों” का इन्कार किया (इस्लाम व कुरान को मानने से इन्कार) , उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे। जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें। निःसन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी हैं” (कुरान सूरा 4, आयत 56) [24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* ईसाइयों और यहूदियों के साथ मित्रता मत करो (सूरा 5, आयत 51)।[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* काफिरों को जहाँ पाओ, उनको जान से मार दो (सूरा 2, आयत 191)।[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* ईमान वालों, अपने आस-पास रहने वाले काफिरों के साथ युद्ध करो। उनको तुम्हारे अन्दर कटुता दिखनी चाहिए। (सूरा 9, आयत 123)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* अल्लाह ग़ैर-मुसलमानों का दुश्मन है। (सूरा 2, आयत 98)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* इस्लाम के अलावा और कोई धर्म/देवता स्वीकार नहीं है। (सूरा 3, आयत 85)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* इस्लाम को न मानने वालों का दिल अल्लाह भर देगा और ग़ैर-मुसलमानों की गर्दन काट कर तुम्हें उनका शरीर काट देना है। (सूरा 8, आयत 12)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* सिर्फ मुसलमानों को अपना करीबी दोस्त बनाएं। (सूरा 3, आयत 118)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* गैर-मुस्लिम दोस्त न बनाएं। (सूरा 3, आयत 28 व सूरा 9, आयत 23)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* गैर-मुसलमानों से तब तक लड़ें जब तक अल्लाह का धर्म पूरी तरह से दुनिया में स्थापित न हो जाए। (सूरा 8, आयत 39)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* मूर्तियाँ गंदी हैं। (सूरा 22, आयत 30)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* मूर्ति पूजा करने वालों को जहाँ कहीं भी मिले, घात लगाकर उन्हें मार डालो। (सूरा 9, आयत 5)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* जहाँ कहीं पाखंडी और मूर्तिपूजक पकड़े जाते हैं, उनकी बुरी तरह से हत्या कर दी जाएगी। (सूरा 33, आयत 61)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* अल्लाह के सिवा कोई पवित्र ईश्वर नहीं है। (सूरा 3, आयत 62, सूरा 2, आयत 255, सूरा 27, आयत 61 व सूरा 35, आयत 3)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करने वाले नर्क के ईंधन हैं। (सूरा 21, आयत 98)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* मूर्ति पूजक अशुद्ध (अपवित्र) है। (सूरा 9, आयत 28)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* काफ़िर आपके खुले दुश्मन हैं। (सूरा 4, आयत 101)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* काफिरों पर ज़ुल्म करो। (सूरा 9, आयत 123)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* काफिरों को नीचा दिखाएँ और उनसे लड़ें। (सूरा 9, आयत 29)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* काफिरों और पाखंडियों के खिलाफ जिहाद (लड़ाई) करो। (सूरा 66, आयत 9)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* हम कुरान का खंडन करने वालों की खाल पकाएँगे। (सूरा 4, आयत 56)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* लूट का सारा माल (लड़कियां व महिलाओं सहित) हलाल है। गैर मुसलमानों के लड़कियां और महिलाओं को गुलाम बना के बलात्कार करना जायज है)। (सूरा 8, आयत 69)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* अल्लाह ईमान वालों के द्वारा काफ़िरों को सताएगा। (सूरा 9, आयत 14)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* युद्धबंदियों को सताओ। (सूरा 8, आयत 57)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

* इस्लाम छोड़ने वालों से बदला लो। (सूरा 32, आयत 22)[24] (काफ़ि़र - विकिपीडिया)

इसी तरह की सैकड़ों आयतों में इस्लाम या उसके सिद्धान्तों में विश्वास न करने वालों के साथ हिंसा का उपयोग करने की सलाह दी गयी है।

ऐसी सोच इस्लाम धर्म की है

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