प्रिय पाठकों ,
आप मेरे आलेख पढ़ते है , मैं हृदय से आभारी हूँ l
आज एक अनोखी मजदूरी के बारे में जानकारी लीजिये l
केरल में एक अनोखी मजदूरी वसूल की जाती है ! मजदूरी ना करने की मजदूरी l जो देनी ही पड़ती है !
यदि आप अपना सामान स्वयं उतारते हैं तो मजदूर दूर से देखते रहेंगे और जब आप अपना काम समाप्त का लेंगे तो ये दर्शक मजदूर आपसे इस बात के पैसे मांगेंगे कि उन्होंने आपको काम करते हुए देखा l
पढ़िए --
Nokku Kooli (घूरने की मजदूरी)…
केरल में आपको अपने घर का सामान भी युनीयन द्वारा ही उतरवाना होता है। टूटने के डर से या अधिक मज़दूरी माँगने के कारण आप नहीं उतरवाना चाहते? कोई बात नहीं, युनीयन वाले बस दूर से आपको सामान उतारते देखेंगे।
जब पूरा सामान आप उतार लेंगे तो ये आएँगे और आप से फिर मज़दूरी माँगेंगे। उतारा नहीं तो क्या हुआ, आपको उतारने देकर आप पर उपकार किया ना? बस दूर से देखा, तोड़ा नहीं, आपका सामान या सिर। उसी की मज़दूरी, जिसे nokku kooli कहते है मलयालम में।
बंगाल में भी यही होता था।
इसीलिए केरल में कोई उद्योग नहीं है, इसीलिए वहाँ से GST collection हरियाणा का एक तिहाई है, इसीलिए वहाँ की लड़कियाँ ISIS नियंत्रित क्षेत्र में काम करने को विवश है।
Communism/समाजवाद कोई राजनीतिक/आर्थिक विचारधारा नहीं है। केवल गूंडा राज gangsterism है, व इसीलिए जो देश/प्रदेश इनके नियंत्रण में आ जाता है उसका विनाश हो जाता है l
चूंकि आपराधिक समाज का, आपराधिक प्रवृत्ति वालों का भी विनाश हो ही जाता है चाहे ऐसा समाज अपनी विचारधारा को राजनीतिक बताये या मज़हबी।
समाचार पत्र और दूरदर्शन समाचार चैनल भी अपराधी हैं जिन्होंने बंगाल व केरल में चल रहे इस gangsterism को कभी उजागर नहीं किया।
चीनी फ़ंडिंग से पोषित घमंडीयां गठबंधन आई.एन.डी.आई.ए. भारत के बड़े बड़े उद्गयोपतियों को टार्गेट कर रहा है… जिससे उनकी फ़ैक्ट्री में काम ठप्प पड़े… और चीन के व्यापार और उत्पादन को भारत में बढ़ावा मिले… तो घमंडीया गठबन्धन की तिजोरियाँ भरें l
आप किसी भी दल के समर्थक हों लेकिन हींडनबर्ग और जॉर्ज सोरोस जैसे मामलों में आपका एक ही पक्ष होना चाहिए… वो है भारत का पक्ष…
पश्चिम नहीं चाहता कि कल को तीसरी दुनिया का कहा जाने वाला देश आज उनके समकक्ष आकर खड़ा हो जाए… अपने नौकर के बेटे के लिए कार का दरवाजा खोलना पड़े तो दिक्कत तो होगी ही…
अम्बानी, अडानी, हिंदुजा, अग्रवाल, गोदरेज, टाटा आदि आदि… ये सब इस देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैँ… सरकार किसी की भी आये… ये सब हैँ तो ही देश का अर्थतंत्र मजबूत है…
घरघाती हरसंभव कोशिश में हैँ पर हमें बहकावे में नहीं आना है… सत्ता प्राप्ति के लिए पॉजिटिव डायरेक्शन में काम करने की बजाय जयचंद शॉर्टकट अपनाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैँ…
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