Saturday, 27 December 2025

कोहेनूर (स्मयन्तक मणि) , मयूर सिंहासन (तख्ते-ताउस) के हाल क्या हैं ?

 भारत का तख्ते ताउस अब कुछ इस हाल में टर्की में पड़ा शर्मिंदा है। भारत चाहे जितना अमीर हो जाये मगर आगामी पीढ़ी यह ध्यान रखे कि जब तक हम ईरान से तख्ते ताउस जितनी रकम और दरिया ए नूर नामक हीरा तथा ब्रिटेन से कोहिनूर हीरा नही ले लेते हमारी लड़ाई पूरी नही होगी।

बात 1737 की है जब पेशवा बाजीराव दिल्ली जीत चुके थे हालांकि मुगल बादशाह को हटाने में सफल नही हुए थे पर इससे दुनिया भर में संदेश गया कि मुगल अब कमजोर है और इसी का फायदा उठाया ईरान के बादशाह नादिर शाह ने।

नादिर शाह ने 1739 में भारत पर आक्रमण किया और मुगलो को हराया, मुगल बादशाह मुहम्मद शाह की ओर से अवध का नवाब सादत खान और हैदराबाद का निजाम चिंकूलीज खान लड़े थे। सादत खान नादिरशाह से मिल गया और नादिरशाह को दिल्ली लूटने के लिये आमंत्रित किया।

नादिरशाह ने दिल्ली में प्रवेश किया और मुहम्मद शाह एक कैदी की तरह चल रहा था। नादिरशाह ने खुद को हिंदुस्तान का बादशाह कहना शुरू कर दिया, वह 3 महीने दिल्ली में रुका शुरू में उसने दिल्ली को नही लूटा। नादिरशाह की हरकतों को पेशवा बाजीराव पुणे में समझ रहे थे मगर ये वो दौर था जब मराठो का युद्ध पुर्तगालियों से चल रहा था इसके अलावा छत्रपति शाहू नही चाहते थे कि पेशवा नादिरशाह से जा भिड़े।

पेशवा मुगलो की सहायता करने को आतुर थे उस समय मराठो की शक्ति छत्रपति के पास होती थी। अतः अब मुगलो को स्वयं ही नादिरशाह से निपटना था, नादिरशाह को 3 महीने ही हुए थे कि दिल्ली में किसी ने अफवाह फैला दी कि नादिरशाह मर गया है। अफवाह जैसे ही फैली दिल्लीवासियों ने ईरानी सैनिकों को मारना शुरू कर दिया इससे नादिरशाह भड़क गया और उसने दिल्ली में कत्लेआम मचा दिया।

दिल्ली में खून की नदी बहने लगी, साथ ही नादिरशाह ने शाहजहाँ द्वारा बनवाया तख्ते ताउस (मयूर सिंहासन) लूट लिया और उसमे जड़ा कोहिनूर हीरा भी। कोहिनूर हीरा द्वापर युग की स्मयन्तक मणि था जिसे श्रीकृष्ण ने यादवों को सौंपा था।

कोहिनूर हीरा इतना कीमती था कि यदि वह मुगलो के पास होता तो मुगल फिर से खुद को खड़ा कर सकते थे। यह इतना महंगा था कि दुनिया भर की गरीबी 3 बार मिटा सकता था। इसके साथ ही नादिरशाह दरिया ए नूर नामक अन्य हीरा भी लूट ले गया।

1748 में ईरान में नादिरशाह की बेरहमी से हत्या कर दी गयी और तख्ते ताउस को कई हिस्सों में तोड़ कर अलग अलग काम मे लिया गया। इसके साथ ही कोहिनूर हीरा नादिरशाह के गुलाम अहमदशाह अब्दाली के हाथ लग गया और बाद में महाराज रणजीत सिंह के पास होता हुआ धोखे से इंग्लैंड पहुँच गया। कोहिनूर अब भी ब्रिटिश महारानी के ताज में जड़ा है।

तख्ते ताउस का बैठने वाला हिस्सा अब टर्की के एक सिंहासन में लगा है और बस यही तख्ते ताउस की अंतिम निशानी है। दरिया ए नूर ईरान की रिजर्व बैंक के कब्जे में है। इसीलिये आज जब भी देखता हूं कि ईरान में कोई बम धमाका हो रहे है लोग भूखों मर रहे है एक मानव होकर भी इसका दुख नही होता।

ईरान और ब्रिटेन से दोस्ती आज हमारी मजबूरी है मगर आने वाली पीढ़ी को संदेश है कि आज से 100-200 या 500 वर्षो बाद जब भी मौका मिले ईरान से अपना खोया सम्मान जरूर प्राप्त करो और ब्रिटेन से कोहिनूर। ईरान में कत्लेआम क्यो ना मचाना पड़े मगर उन्हें याद दिलाओ की मुसलमानो के साथ हमारी लड़ाई राष्ट्रीय है अंतरराष्ट्रीय नही की दुनिया की कोई भी ताकत हिन्दू मुस्लिम झगड़ो का फायदा उठा ले।

जिस तरह यहूदी अपने बच्चो को येरुशलम की दीवार के बारे में बताते थे ठीक उसी तरह हर भारतीय लाल किले में हुई इस लूट के बारे में अपने बच्चों को बताए। मुसलमानो से निवेदन है कि वे भी अपने बच्चों को इसके लिये आगाह करे, हमारी शत्रुता इस्लाम या पैगम्बर से नही है बल्कि कट्टरपंथ से है जिस दिन इस्लाम से कट्टरपंथ समाप्त हो जाएगा हमारी कट्टरता भी शून्य हो जाएगी।

"भारत सर्वोपरि" 💪💪

जय श्री राम 🙏🚩

Wednesday, 17 December 2025

क्या लालकिला शाहजहाँ ने बनवाया था ? सफ़ेद झूठ !

 गौर से पढ़िए इस चित्र के नीचे लिखी इस बात को,

यह चित्र ऑक्सफोर्ड संग्रहालय में लगा हुआ है, जिसमें चित्र के नीचे उसके संदर्भ में लिखा हुआ है कि,

शाहजहां 1628 के लालकिले के "दीवाने आम" में विदेशी राजदूत से मिला,

अर्थात 1628 में भी लालकिला मौजूद था लेकिन जवाहर लाल नेहरू के कालखंड में कांग्रेस सरकार पोषित वामपंथी इतिहासकारों ने लिखा है कि,

लालकिला शाहजहां ने 1638 में बनवाया, जबकि तथ्य बताते हैं कि लालकिला पृथ्वीराज चौहान के नाना महाराजा अनंगपाल ने उस मुग़ल बादशाह शाहजहां से कई शताब्दी पहले बनवाया था।

वामियों और कामियों (खान्ग्रेसियों ) ने गढ़ा एक झूठ और पढाया  भी l 

Tuesday, 16 December 2025

चंवर राजवंश (चमार जाति) का इतिहास...

 

चंवर राजवंश (चमार जाति) का इतिहास...

         अलाऊद्दीन खिलजी के शासनकाल से पहले पूरे भारतीय इतिहास में 'चमार' नाम की किसी जाति का उल्लेख नहीं मिलता। आज जिन्हें हम चमार जाति से संबोधित करते हैं और जिनके साथ छुआछूत का व्यवहार करते हैं, दरअसल वह वीर चंवर वंश के महान योद्धा थे।

          भारत के सबसे विश्वसनीय इतिहास लेखकों में से एक विद्वान कर्नल टाड को माना जाता है, जिन्होनें अपनी पुस्तक द हिस्ट्री आफ राजस्थान में चंवर वंश के बारे में विस्तार से लिखा है।

         प्रख्यात लेखक डॅा विजय सोनकर शास्त्री ने भी गहन शोध के बाद इनके स्वर्णिम अतीत को विस्तार से बताने वाली पुस्तक हिन्दू चर्मकार जाति एक स्वर्णिम गौरवशाली राजवंशीय इतिहास" लिखी। महाभारत के अनुशासन पर्व में भी इस राजवंश का उल्लेख है। डॉ शास्त्री के अनुसार प्राचीनकाल में न तो चमार कोई शब्द था और न ही इस नाम की कोई जाति ही थी

         हमारे  भारत में सभी सुसंगठित पंचायतों से 150 से अधिक चमार समुदाय की उपजातियों की पहचान होती है, इनमे राजवंशीय क्षत्रिय गौत्र मिलते है जिनमे तंवर/तोमर, तूर, पातलीय/पातलान, बशिषट, भदोरिया/भभौरिया, सोलंकी, परमार, पंवार, दहिया, रोहिलला आदि गौत्र समिलित है।

         डॅा विजय सोनकर शास्त्री के अनुसार तुर्क आक्रमणकारियों के काल में चंवर राजवंश का शासन भारत के पश्चिमी भाग में था और इसके प्रतापी राजा चंवरसेन थे। इस क्षत्रिय वंश के राज परिवार का वैवाहिक संबंध बाप्पा रावल वंश के साथ था। राणा सांगा व उनकी पत्नी झाली रानी ने चंवरवंश से संबंध रखने वाले संत रैदासजी को अपना गुरु बनाकर उनको मेवाड़ के राजगुरु की उपाधि दी थी और उनसे चित्तौड़ के किले में रहने की प्रार्थना की थी।

        संत रविदास चित्तौड़ किले में कई महीने रहे थे। उनके महान व्यक्तित्व एवं उपदेशों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें गुरू माना और उनके अनुयायी बने। उसी का परिणाम है आज भी विशेषकर पश्चिम भारत में बड़ी संख्या में रविदासी हैं। राजस्थान में चमार जाति का बर्ताव आज भी लगभग राजपूतों जैसा ही है। औरतें लम्बा घूंघट रखती हैं आदमी ज़्यादातर मूंछे और पगड़ी रखते हैं।

        संत रविदास की प्रसिद्धी इतनी बढ़ने लगी कि इस्लामिक शासन घबड़ा गया। सिकन्दर लोदी ने मुल्ला सदना फकीर को संत रविदास को मुसलमान बनाने के लिए भेजा। वह जानता था कि यदि रविदास इस्लाम स्वीकार लेते हैं तो भारत में बहुत बड़ी संख्या में इस्लाम मतावलंबी हो जायेगे। लेकिन उसकी सोच धरी की धरी रह गयी। स्वयं मुल्ला सदना फकीर शास्त्रार्थ में पराजित हो कोई उत्तर न दे सका और उनकी भक्ति से प्रभावित होकर अपना नाम रामदास रखकर उनका भक्त वैष्णव (हिन्दू) हो गया। दोनों संत मिलकर हिन्दू धर्म के प्रचार में लग गए जिसके फलस्वरूप सिकंदर लोदी आगबबूला हो उठा एवं उसने संत रैदास को कैद कर लिया और इनके अनुयायियों को चमार यानी अछूत चंडाल घोषित कर दिया। उनसे कारावास में खाल खिचवाने, खाल चमड़ा पीटने, जुती बनाने इत्यादि काम जबरदस्ती कराया गया उन्हें मुसलमान बनाने के लिए बहुत शारीरिक कष्ट दिए। लेकिन संत रैदास ने कहा:-

        वेद धर्म सबसे बड़ा, अनुपम सच्चा ज्ञान,
फिर मै क्यों छोडू इसे, पढ़ लूं  झूठ कुरान.
वेद धर्म छोडू नहीं, कोसिस करो हज़ार,
तिल-तिल काटो चाहि, गोदो अंग कटार

(रैदास रामायण)

     संत रैदास पर हो रहे अत्याचारों के प्रतिउत्तर में चंवर वंश के क्षत्रियों ने दिल्ली को घेर लिया। इससे भयभीत हो सिकन्दर लोदी को संत रैदास को छोड़ना पड़ा था। 

  संत रैदास का यह दोहा देखिए:-

      बादशाह ने वचन उचारा | मत प्यारा इसलाम हमारा ||
खंडन करै उसे रविदासा | उसे करौ प्राण कौ नाशा ||
जब तक राम नाम रट लावे | दाना पानी यह नहीं पावे ||
जब इसलाम धर्म स्वीकारे | मुख से कलमा आप उचारै ||
पढे नमाज जभी चितलाई | दाना पानी तब यह पाई ||

      समस्या तो यह है कि आपने और हमने संत रविदास के दोहों को ही नहीं पढ़ा, जिसमें उस समय के समाज का चित्रण है जो बादशाह सिकंदर लोदी के अत्याचार, इस्लाम में जबरदस्ती धर्मांतरण और इसका विरोध करने वाले हिंदू ब्राहमणों व क्षत्रियों को निम्न कर्म में धकेलने की ओर संकेत करता है।

        चंवर वंश के वीर क्षत्रिय जिन्हें सिकंदर लोदी ने 'चमार' बनाया और हमारे आपके हिंदू पुरखों ने उन्हें अछूत बना कर इस्लामी बर्बरता का हाथ मजबूत किया। इस धर्म वीर महान समाज ने पददलित और अपमानित होना स्वीकार किया, लेकिन विधर्मी होना स्वीकार नहीं किया आज भी यह समाज हिन्दू धर्म का आधार बनकर खड़ा है। कश्मीर के दलित समाज भी इस वीर गाथा का उदाहरण हैं जिन्हेई मुसलमानों ने दबा कर रखा लेकिन वे धर्मान्तरित नहीं हुए l 

  #साभार

 

Saturday, 13 December 2025

Numbers which can be divided by all 1-10. Find by Shri Ramanujan

 #अद्भूत 🙏

गणित में कोई भी संख्या 1 से 10 तक के सभी अंकों से नहीं कट सकती, लेकिन इस विचित्र संख्या को देखिये ..!

दरअसल, सदियों तक यह माना जाता रहा था कि ऐसी कोई भी संख्या नहीं है जिसे 1 से 10 तक के सभी अंको से विभाजित किया जा सके। लेकिन रामानुजन ने इन अंकों के साथ माथापच्ची करके इस मिथ को भी तोड़ दिया था। उन्होंने एक ऐसी संख्या खोजी थी जिसे 1 से 10 तक के सभी अंकों से विभाजित किया जा सकता है। यानी भाग दिया जा सकता है। यह संख्या है 2520,

संख्या 2520 अन्य संख्याओं की तरह वास्तव में एक सामान्य संख्या नही है, यह वो संख्या है जिसने विश्व के गणितज्ञों को अभी भी आश्चर्य में किया हुआ है।

यह विचित्र संख्या 1 से 10 तक प्रत्येक अंक से भाज्य है। ऐसी संख्या जिसे इकाई तक के किसी भी अंक से भाग देने के उपरांत शेष शून्य रहे, बहुत ही असम्भव/ दुर्लभ है - ऐसा प्रतीत होता है।

अब निम्न सत्य को देखें :

2520 ÷ 1 = 2520

2520 ÷ 2 = 1260

2520 ÷ 3 = 840

2520 ÷ 4 = 630

2520 ÷ 5 = 504

2520 ÷ 6 = 420

2520 ÷ 7 = 360

2520 ÷ 8 = 315

2520 ÷ 9 = 280

2520 ÷ 10 = 252

महान गणितज्ञ अभी भी आश्चर्यचकित है : 2520 वास्तव में एक गुणनफल है《7 x 30 x 12》का। उन्हे और भी आश्चर्य हुआ जब प्रमुख गणितज्ञ द्वारा यह संज्ञान में लाया गया कि संख्या 2520 हिन्दू संवत्सर के अनुसार एकमात्र यही संख्या है जो वास्तव में उचित बैठ रही है, जो इस गुणनफल से प्राप्त हैः

सप्ताह के दिन (7) x माह के दिन (30) x वर्ष के माह (12) = 2520

यही है भारतीय गणना की श्रेष्ठता

Thursday, 11 December 2025

अयोध्या में धर्मध्वजा स्थापना करने वाले - भारतीय सेना की 316 EME सैन्य यूनिट के वीर

जय हिन्द  

अयोध्या में धर्मध्वजा स्थापना का कार्यक्रम निर्बाध रूप से संपन्न हो गया ।

पर आपको जाकर बहुत ही खुशी होगी कि इस पुरे कार्यक्रम का कार्यभार भारतीय सेना के 316 EME सैन्य यूनिट पर था।

316 यूनिट्स भारतीय सेना के उन महत्वपूर्ण यूनिट्स में से है जो भारत के दुर्गम और ऊँचाई वाले स्थलों पर भी भारी संरचनाओं के high precision mechanical कार्यों में महारत रखती हैं।

अयोध्या मंदिर का ध्वजदंड साधारण नहीं था। यह लगभग सैकड़ों किलो वजन का है, जिसे मिलीमीटर-लेवल बैलेंसिंग की जरूरत होती है।

ऐसा काम वही यूनिट करती है जिसे सेना में flag mast installation specialists माना जाता है।

बद्रीनाथ, केदारनाथ से लेकर वैष्णों देवी के ऊंचाई पर भारतीय सेना की यह यूनिट वहां के भारी भरकम धर्मदंड और धर्मध्वजा बहुत कुशलता पुर्वक लहराने का काम करती रही है।

अयोध्या जैसे राष्ट्रीय भावनाओं के केंद्र स्थल पर सबसे भरोसेमंद तकनीकी सैन्य यूनिट भेजना एक सम्मान भी है और जिम्मेदारी भी, जिसे बहुत ही कुशलता पूर्वक सेना ने पूरा किया🙏🙏🙏🙏

Sunday, 30 November 2025

मंदिर , देव द्वारा , देवरा , को संरक्षित कीजिये l पुजारी का सम्मान कीजिये

 आप किसी भी जाति, वर्ण के हों, आपके गाँव में आपके कुल देवता/ग्राम देवता की डीह होगी। मन्दिर न हो तो कम से कम देवस्थान अवश्य होगा। पहले वहाँ आपकी ही जाति के पुजारी, भगत आदि होते थे। पता कीजियेगा, क्या अब भी वहाँ कोई भगत है? तनिक याद कीजिये, वहाँ अंतिम बार आपके घर से कब भोग चढ़ाया गया था? सम्भव है वर्षों बीत गए हों। सम्भव है आपको वहाँ गए दसियों वर्ष बीत गए हों। यह भी सम्भव है कि आपको इसके सम्बंध में कोई जानकारी ही न हो। है न?

गाँव में मन्दिर के निर्माण के लिए चंदा लगता है तो हम सभी अपने सामर्थ्य अनुसार दान करते हैं। मन्दिर में किसी आयोजन के लिए भी चंदा दिया जाता है। पर याद कीजिये, मन्दिर में रोज लगाए जाने वाले भोग के लिए आपने अंतिम बार कब पैसे दिए थे? याद है?

आपको पता भी है कि आपके गाँव वाले मन्दिर के पुजारी को कोई वेतन भी दिया जाता है या नहीं? आपने अंतिम बार उन साधु-पुजारी को कब पैसे दिए थे?

शहर के मंदिरों की दशा लगभग ठिक है, पर गाँव के अधिकांश मन्दिर अब धीरे धीरे खाली होते जा रहे हैं। पहले साधू होते थे और वे निःस्वार्थ भाव से मन्दिर की सेवा करते थे। हम दो हमारा एक वाले समय में अब कौन बन रहा है साधु? तो मंदिरों की व्यवस्था के लिए अब साधु के स्थान पर पुजारी रखना पड़ रहा है। पर अधिकांश ग्रामीण मंदिरों में इतनी भी आय नहीं कि ठिक से भोग लग सके। पुजारी का वेतन तो भूल जाइए। रख रखाव और दैनिक खर्च का जुगाड़ करना कठिन हो रहा है। अब सोचिये! इनका ध्यान कौन रखेगा?

तनिक घूम कर देखेंगे तो पाएंगे कि ग्रामीण क्षेत्र के असंख्य मंदिरों में कोई पुजारी तक नहीं है। कौन करेगा? हमारे आपके पास समय है नहीं। ब्राह्मणों ने पिछले साठ सत्तर साल में इतनी गाली सुन ली कि अब कोई पुरोहिती करना नहीं चाहता, मन्दिर पर रहने को तो भूल ही चाहिए। पुजारी बनने का अधिकार मांगने वाले केवल फेसबुक पर बोलते हैं, उन्हें पुजारी बनना नहीं है। बनना होता तो लाखों मन्दिर खाली है, कहीं चले जाते...

जो लोग मूल गाँव छोड़ कर शहरों में बस गए उनसे उनके कुलदेवता की डीह छूटी, ग्राम देवता छूटे, काली-माई, बरम बाबा छूटे। उन देव स्थानों की ओर कभी मुड़ कर देखने का भी समय नहीं, और हमें लगता है कि हम जगे हुए हिन्दू हैं।

जितना मैं समझ पा रहा हूँ, श्रद्धा से अपने गाँव के मन्दिर पर जा कर घण्टे भर बैठने से अच्छी तीर्थयात्रा कोई नहीं। यदि आप उस छोटे मन्दिर की व्यवस्था सुधारने में अपना योगदान दे रहे हैं तो जैसे बहुत बड़ा यज्ञ कर रहे हैं। महीने में एक बार भी मन्दिर का भोग अगर हमारे पैसे से होने लगे तो हम स्वयं को जगा हुआ हिन्दू कह सकते हैं। अपने गाँव जवार के किसी जीर्ण मन्दिर का उद्धार करा दिए, किसी ग्रामदेवता की डीह पर पूजा की परम्परा शुरू करा दिए तो वही बदरी केदार है भाई साहब!

ढोल गाँव के मन्दिर पर भी बजना चाहिये महाराज! ईश्वर वहाँ भी हैं।

Thursday, 27 November 2025

कालभोज - बाप्पा रावल

 है कोई फ़िल्म निर्माता जो इस विषय पर फ़िल्म बनाये।

यदि बन गई तो वह अब तक की सबसे अधिक कमाई वाली फिल्म बनेगी

क्योंकि यह एक बिल्कुल ही प्रासंगिक विषय है।

◆|कालभोज◆

एक राजपूत बालक की गाय रोज दूध दुहने के समय कहीं चली जाती थी। उस बालक को रोज भूखा रहना पड़ता था इसलिए एक दिन वो उस गाय के पीछे पीछे गया। गाय एक ऋषि के आश्रम में पहुंची और एक शिवलिंग पर अपने दूध से अभिषेक करने लगी। बालक को बड़ा आश्चर्य हुआ ये क्या चक्कर है तभी उसने देखा उसके पीछे एक ऋषि खड़े मुस्कुरा रहे है। ऋषि का नाम था "हारीत ऋषि"।

उन्होंने उस बालक को शिक्षा दीक्षा दी और उनके आशीर्वाद से उन्होंने 734 ईस्वी में मनमोरी नामक मौर्य सम्राट को चितौड़ में हराकर अपनी शाख बढ़ाई।

इस बालक का नाम था "कालभोज" जिसे सब बप्पा रावल के नाम से जानते थे, हरित ऋषि के आशीर्वाद से बप्पा महादेव के बहुत बड़े भक्त हुए। उनकी धर्म मे इतनी रुचि थी कि जहां भी धर्म पर आघात होते वही पर बप्पा का कहर टूटता और उस जगह को पुनः सनातन में मिला कर भगवा लहराते। आठ फीट से अधिक उचाई वाले  काल भोज के नाम पर ही रावलपिंडी नाम पडा .

712 ईस्वी में जब मोहम्मद क़ासिम ने राजा दाहिर को छल से मार दिया तो उसने सिंध में इस्लाम की सत्ता लहरा दी, मगर ये ज्यादा दिन तक नही रहा। बप्पा रावल उनपर रुद्र बनके टूटे और मुहम्मद कासिम को उस समय के ख़लीफ़ा ने वापस बुलाया, बुलाया क्या मुहम्मद क़ासिम को भागना पड़ा।

मगर इस्लाम के शासकों को चैन कहाँ था उन्होंने दो तरफ से मेवाड़ पर हमला बोला। अबकी बार बप्पा रावल ने कहर मचा दिया उन्होंने ऐसी मारकाट मचाई की इस्लाम के इन आक्रमणकारियों ने इतिहास में भी कभी नही सुनी थी। दूसरी तरफ से गुर्जर प्रतिहार वंश के नागभट्ट प्रथम ने उनको दक्षिण पश्चिमी राजस्थान की तरफ से दौड़ा दौड़ा कर मारा।

फिर बप्पा रावल ने एक ऐसा काम किया कि अगले 400 साल तक अरब और इस्लामी शासकों ने भारत की तरफ मुंह उठाकर भी नही देखा। उन्होंने छोटे मोटे सरदारों और नागभट्ट प्रथम व विक्रमादित्य द्वितीय के साथ मिलकर एक हिन्दू सेना का निर्माण किया। इस सेना ने अरब के अल हकम बिन अलावा, तामिम बिन जैद अल उतबी, अब्दुलरहमान अल मूरी की ऐसी खटिया खड़ी की कि इस्लामी शासक बप्पा रावल के नाम से भी थर थर कांपने लगे।

बप्पा यही नही रुके उन्होंने गजनी के शासक सलीम को बुरी तरह हराया, और अपने भतीजे को वहां की गद्दी पर बिठा आये। अरबी शासकों ने गजवा- ए - हिन्द के सपने को सपना ही मान लिया। गांधार, तुरान, खुरासान और ईरान तक अपनी सत्ता का परचम लहराया और वहां भगवा राज कायम किया। उनके डर से 35 मुस्लिम शासकों ने अपनी लड़कियों का ब्याह उनसे कर दिया था।

713 ईस्वी में जन्मे बप्पा रावल ने लगभग 19- 20 साल शासन के बाद सन्यास ले लिया। 97 वर्ष की आयु में उन्होंने इस संसार को त्याग दिया। उनके चलाये सिक्के पर नन्दी व शिवलिंग का चित्र था और त्रिशूल के साथ पुरुष आकृति। आज भी भारत के समग्र इतिहास में यदि हम खोजे तो ऐसा कोई योद्धा नही मिलता जिसने इस्लाम शासकों को इस तरह घुटनों के बल लाया हो कि वे 400 साल तक उस बप्पा के कहर के डर से भारत की तरफ आंख उठा कर भी नही देख पाए हो।

बप्पा रावल के नाम से बसा रावलपिंडी आज भी पाकिस्तान की छाती पर खड़ा दुश्मनों को उनकी औकात दिखा रहा है

समय मिले तो अपने असली इतिहास को ज़रूर पड़े

झूठे इतिहास सिर्फ़ कांग्रेस और वामियो की देन है

Tuesday, 18 November 2025

तुम्हारी आदतें बता देती हैं कि बैंक अकाउंट में कितना होगा!

With Thanks to Raj Gupta for this article

 "तुम्हारी आदतें बता देती हैं कि बैंक अकाउंट में कितना होगा!" — जानिए कौन-सी आदतें बनाती हैं अमीर और कौन-सी रखती हैं कंगाल….!

कभी किसी को देखकर मन में आया है —
“इसका बैंक अकाउंट तो तगड़ा होगा!”
असल में, 
पैसे का स्तर हमारी सैलरी नहीं, हमारी आदतें तय करती हैं।

आप रोज़ कितना कमाते हैं, उससे ज़्यादा मायने रखता है कि आप रोज़ क्या करते हैं
तो चलिए जानते हैं, आपकी कौन-सी छोटी-छोटी आदतें तय करती हैं कि आपका बैंक बैलेंस हमेशा भरा रहेगा या महीने के आखिर में जीरो हो जाएगा।


🧠 1. “हर महीने बचाने की आदत बनाम खर्च करने की मजबूरी”

👉 अगर आप सैलरी मिलते ही EMI, पार्टी, या ऑनलाइन शॉपिंग में सब उड़ा देते हैं — तो आपका बैंक अकाउंट महीने के आखिर में खाली ही रहेगा।
👉 लेकिन अगर आप पहले 20% बचा कर रखते हैं और बाकी खर्च करते हैं — तो धीरे-धीरे अमीरी की आदत बनती है।

स्मार्ट मूव:
हर महीने ऑटो-डेबिट लगाएँ ताकि आपकी इनकम से पहले ही सेविंग कट जाए।

☕ 2. “छोटी चीज़ों में बड़ा पैसा उड़ाना”

एक Starbucks कॉफी ₹300, Zomato ऑर्डर ₹400, Movie Ticket ₹350...
और फिर कहते हैं — “पता नहीं पैसा कहाँ चला गया!”

ये micro-spends ही धीरे-धीरे बैंक अकाउंट को खाली करते हैं।
वहीं जिनकी आदत है खर्च लिखने की — वो जानबूझकर सोचते हैं, 
"क्या ये चीज़ वाकई ज़रूरी है?"

💡 स्मार्ट हैक: रोज़ के खर्च ट्रैक करें।
🔗 
Money Tracker Diary

सिर्फ 10 दिन तक ट्रैक करिए, आपको खुद पता चलेगा कि पैसा कहाँ उड़ रहा है।


🕒 3. “Time Invest करने वाले बनाम Time Waste करने वाले”

पैसेवाले लोग अपने टाइम को Asset की तरह इस्तेमाल करते हैं।
वे सोशल मीडिया पर स्क्रॉल नहीं, 
Skill Build या Learning Invest करते हैं।

जिनकी आदत है रोज़ कुछ नया सीखने की — वो आगे जाकर पैसे की नई-नई Source बना लेते हैं।

🎯 Learn something new from Udemy

(यहाँ से आप Data Skills सीखकर ₹60,000+ तक की Extra Income बना सकते हैं।)


📱 4. “Social Media vs Smart Media”

90% लोग सोशल मीडिया सिर्फ स्क्रॉल करने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
लेकिन 10% लोग वही प्लेटफॉर्म 
Income Source बना लेते हैं —
Facebook Reels, YouTube Shorts, Quora Writing या Instagram Blogging से।

🔗 Develop a skill Coursera | Online Courses & Credentials From Top Educators. Join for Free

(आप भी अपनी राय और जानकारी शेयर करके हर महीने ₹5,000-₹25,000 कमा सकते हैं।)

आदत सिर्फ फर्क लाती है — कोई कंटेंट खाता है, कोई कंटेंट बनाता है।


💳 5. “Credit Card से Lifestyle या Trap?”

Credit Card अगर सही तरीके से इस्तेमाल हो तो Financial Freedom देता है,
गलत तरीके से इस्तेमाल हो तो Debt Trap।

  • Cashbacks, EMI-less offers = Smart Use
  • Minimum Due Payment, Impulse Shopping = Bad Habit

💳 Axis MyZone Credit Card Store

(Smart Card, Real Rewards — कोई hidden charges नहीं)


🏠 6. “घर चलाने वाले और खर्च गिनने वाले में फर्क”

अमीर लोग हर महीने Expense Sheet बनाते हैं।
वे जानते हैं, किस चीज़ पर कितना जा रहा है।
जो सिर्फ खर्च करते हैं बिना गिने — वो हमेशा तंगी में रहते हैं।


💡 7. “Invest करने की हिम्मत बनाम डर में जीना”

पैसेवालों की एक बड़ी आदत — वे अपने पैसे को काम पर लगाते हैं
जो लोग SIP, Mutual Fund या P2P Investment में धीरे-धीरे पैसा लगाते हैं,
वो Compound Interest का फायदा उठाते हैं।

💸 Start SIP Angel One

(Free Account खोलें और SIP शुरू करें – No Brokerage)

वहीं जो लोग “Risk से डरते हैं”, उनके पैसे महंगाई खा जाती है।


🔁 8. “Consistency – अमीरी की असली पहचान”

सफल लोग एक दिन में अमीर नहीं बनते, बल्कि रोज़ छोटी-छोटी अच्छी आदतें दोहराते हैं —
हर दिन थोड़ा बचाना, थोड़ा सीखना, थोड़ा प्लान करना।

अगर आप हर दिन सिर्फ ₹200 बचाते हैं, तो साल के आखिर में ₹73,000 आपके पास होंगे —
और यही छोटी-छोटी consistency अमीरी का बीज है।

📘 Atomic Habits Book In Hindi


🔚 निष्कर्ष — “आदतें बदलो, हालत खुद बदल जाएगी!”

आपका बैंक अकाउंट आपके Character का आईना है।
कोई भी बड़ी अमीरी किसी Jackpot से नहीं आती —
वो आती है आपकी रोज़मर्रा की समझदारी, Planning और आदतों से।

👉 इसलिए अगली बार जब आप किसी चीज़ पर खर्च करें, सोचिए —
“क्या यह मेरी हैबिट बैंक बैलेंस बढ़ा रही है या घटा रही है?”

✍️ Written by Raj Gupta

Monday, 17 November 2025

आप हर साल एक लाख रुपे गवां देते हैं !! Every Middle class Looses

 कैसे भारतीय मिडिल क्लास हर 5 साल में बिना जाने ₹5 लाख गंवा देते है!

(एक सच जिसे जानकर आप सोच में पड़ जाओगे)

क्या आपको पता है कि भारतीय मिडिल क्लास हर 5 साल में लगभग ₹5 लाख रुपये गंवा देती है — बिना ये जाने कि पैसा जा कहां रहा है?
ये कोई फ्रॉड या स्कैम नहीं है — ये आपकी ही कुछ छोटी-छोटी आदतें हैं जो धीरे-धीरे आपकी जेब खाली करती हैं।


🧾 1. EMI का जाल – “Zero Down Payment” की कीमत

हर मिडिल क्लास व्यक्ति किसी ना किसी EMI में फंसा होता है — मोबाइल, बाइक, कार या क्रेडिट कार्ड का।
मान लीजिए हर महीने ₹6,000 की EMI है, जो 5 साल में ₹3.6 लाख बन जाती है।
अब सोचिए — अगर यही पैसा किसी 
SIP (Systematic Investment Plan) में 12% रिटर्न के साथ लगाते, तो 5 साल में वो ₹4.3 लाख होता।
👉 यानी आपने 
₹70,000 का नुकसान सिर्फ खर्च करने की आदत से किया।

💡 समाधान:
हर EMI से पहले एक “Self EMI” बनाइए — पहले अपने लिए सेविंग कीजिए, फिर बाकी खर्च कीजिए।
📈 Recommended 
Amazon.in: Sip Journal


🛒 2. “Offers” का Trap – Discount नहीं, Distraction है

Flipkart, Amazon और Swiggy जैसी कंपनियाँ “Festive Sale” के नाम पर आपकी psychology खेलती हैं।
आप सोचते हैं आप बचत कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में आप वो खरीद रहे हैं जिसकी ज़रूरत नहीं है।
औसतन एक मिडिल क्लास फैमिली हर साल 
₹20,000-₹25,000 सिर्फ offers में बर्बाद कर देती है।

💡 समाधान:
हर online order से पहले खुद से पूछें — 
“अगर आज offer न होता, तो क्या मैं ये लेता?”
अगर जवाब “नहीं” है, तो वो खर्च नुकसान है।

write everything on journal : Amazon.in: Sip Journal


📉 3. बैंक में पैसा पड़ा रहना – “Silent Loss”

ज्यादातर लोग अपना पैसा saving account में रखते हैं जहां interest सिर्फ 2.5%–3.5% है, जबकि inflation 6% से ऊपर है।
इसका मतलब — हर साल आपका पैसा value खो रहा है।

💡 समाधान:
पैसे को 
short-term debt funds या liquid mutual funds में रखिए जहां 6–7% तक रिटर्न मिलता है।

👉 Example: Think And Grow Rich In Hindi


🚬 4. Unplanned Lifestyle & No Tracking

कई middle-class लोग अपने खर्च track नहीं करते।
हर महीने 500–1000 रुपये बिना ध्यान दिए “चाय, स्नैक्स, online subs” में उड़ जाते हैं।
5 साल में यही बन जाता है 
₹60,000–₹70,000।

💡 समाधान:
Expense tracker app लगाइए जैसे 
Journaling Diary

हर हफ्ते review करें कि कहाँ leak हो रहा है।


🧠 5. Financial Education की कमी

सबसे बड़ा नुकसान पैसे का नहीं, ज्ञान का होता है।
Middle-class लोग पैसे कमाते हैं, लेकिन उन्हें बढ़ाने की skill नहीं सीखते।
Investing, tax-saving, side income — इन सब चीज़ों को न जानना ही 5 साल में लाखों का नुकसान करा देता है।

💡 समाधान:
हर हफ्ते 30 मिनट finance सीखने में लगाइए।
YouTube चैनल जैसे 
Pranjal KamraCA Rachana Ranade और ब्लॉग जैसे Raj Gupta I Global insights को follow करें।

💬 निष्कर्ष:

मिडिल क्लास लोग इसलिए नहीं पिछड़ते क्योंकि वो मेहनत नहीं करते,
बल्कि इसलिए क्योंकि वो अपने पैसे को 
direction नहीं देते।

👉 अगर आप भी अपने ₹5 लाख बचाना चाहते हैं, तो आज से शुरू कीजिए —
एक SIP, एक Skill और एक Smart Decision।