Tuesday, 30 March 2021

क्या वैदिक गणित पारंपरिक गणित से अधिक प्रभावी और उत्तम है, Vaidik Maths

 वैदिक गणित निःसंदेह पारम्परिक गणित से श्रेष्ठ है........!

पारम्परिक गणित जिसे आज तक हम पढ़ रहे हैं।  ९९ प्रतिशत विद्यार्थी उससे भय रखने लगता है।  

गणित- यदि स्पष्ट कहें तो धन , ऋण , गुणा और विभाजन , (प्लस, माइनस, मल्टीप्लय और डिवीज़न ) का खेल है किन्तु इसमें तर्क और सूत्र के प्रयोग से एक निश्चित परिणाम ही प्राप्त होते है।  

वैदिक गणित आपकी तर्क शक्ति को रुचिपूर्ण बनाकर गणित को खेल बना देता है। 

और आप अपने सरे गणना कार्य क्षणांश में कर पाते है, किन्तु  निरंतरअभ्यास दोनों गणित में आवश्यक है। 

त्रिकोणमिति (Trigonometry), बीज गणित (algebra ) अदि सभी वैदिक गणित का ही भाग है।  

वैदिक गणित विस्तार से सीखने वाले जानते है कि उनके लिए गणित एक मनोरंजक विषय है।  

प्रश्न है कि भारत सरकार इसे पाठ्यक्रम में क्यों नहीं सम्मिलित करती ?

वैदिक गणित अनेको विश्वविद्यालय और विद्यालयों में पढ़ाया जा रहा है।  अनेको संगठन, सांस्कृतिक , आध्यात्मिक सामाजिक संस्थाएं वैदिक गणित के व्यावहारिक ा एवं प्रमाणपत्र आधारित पाठ्यक्रम चला रही हैं।  आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था, श्री श्री विश्वविद्यालय उड़ीसा , अमृता विश्व विद्यापीठम, इंदिरा गाँधी मुक्त विश्वविद्यालय आदि द्वारा वैदिक गणित के पूर्णकालिक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।     

NCERT द्वारा भी वैदिक गणित विषय को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया गया है. 

अहा है आप इस उत्तर से प्रेरित होकर वैदिक गणित सीखने को संकल्प बढ़ होंगे. 

सभी से बांटें और प्रशंसा करें. 


पढ़ने के लिए धन्यवाद् 

डॉ विनोद मिश्र 

Vedic mathematics is undoubtedly superior to traditional mathematics …….

The traditional mathematics that we are studying till date. 99 percent of the students are afraid of it.

Mathematics- If we assert is, Addition, Subtraction, multiplication and division but only a certain result can be obtained by using logic and formula

Vedic Mathematics makes Mathematics a game by making your reasoning power interesting.

And you are able to do all your calculations in the moment, but continuous practice is necessary in both mathematics.

Trigonometry, algebra, etc. are all part of Vedic mathematics.

Vedic Mathematics learners know that Mathematics is an entertaining subject for them.

The question is why the Indian government does not include it in the syllabus?

Vedic mathematics is taught in many universities and schools. Many organizations, cultural, spiritual and social organizations are offering practical and certificate based courses of Vedic Mathematics. Full-time courses of Vedic Mathematics are available by Art of Living Society, Sri Sri University of Orissa, Amrita Vishwa Vidyapeetham, Indira Gandhi Open University etc.

The subject of Vedic Mathematics has also been included in the syllabus by NCERT.

This is why you will be inspired to learn Vedic Mathematics by being inspired by this answer.

Share and praise to everyone.

Thanks for reading

Dr. Vinod Mishra

KUMBH an informal Gathering with FORMAL objectives in India

 The common meaning of Kumbh is a pot.

But the deeper meaning is 'the place or container where something is collected, safe and protected'.

The name of Kumbh is given to the holy assembly of deities at four places in India i.e. Haridwar, Prayagraj, Ujjain and Nashik. In fact it was and still is a gathering of scholars, scientists, experts, researchers, inventors, and evaluators as well as curious, followers, viewers, appraisers. 

Nowadays, international, national, global, research seminars and conferences on various subjects, themes are organized by Research Centers, Educational institutes, universities and publishers, non-governmental and private institutions. Along with these meetings, the sponsors do their business, and thrive on other things as well. All activities have been helpful in keeping the world moving and the economic cycle as well and economy has been a major objective for centuries. We business, trading, exporting have always been respected in India but other works also received equal respect. Dharma (The Ethical Duties), Artha (The Money), Kama (The needs. desires), and Moksha (salvation)  is the four cycles of purushartha. (The objectives of Human incarnation) and these are the four wheels of the chariot deemed as a person, society, and nation. These chariot have to Balance, harmony, equity and equal distribution among the variables, It was and still is the moral duty of the king, guru / teacher, parents, system, officer, minister. They were being given salaries, awards and best training for these work.

In reality.....

Such seminars have been happening in our country / India for thousands of years. Representative scholars from all over the world, the curious would come to these seminars, present their research, great research, inventions, give lectures and thus spread new things and knowledge.

Kumbh the great/ major gathering held in four years and conferences were held annually, half-yearly or contemporary in states, districts and universities. As it happens even today. It was still in these events that institutions, businessmen, industrialists, workers, were making their new contracts, new employees, officers, officers and individuals also chose them. In these events, new relationships were also formed, were also self-made, that is, the development, expansion and promotion of trade and behavior, religion and culture were also done. All these are mentioned briefly in the Sangam literature.

The mythological story of Kumbh (Puran means always novel) is such that the Samudra Manthan was organized in which scholars, experts, deities came from all over the world. Demons and humans also gathered. Brihaspati, the guru of gods and humans, and Shukracharya, the guru of the Danavas. 

Brahma Ji the creator, was chosen as the father of knowledge, the father of wisdom, Vishnu, the protector and Lord Shiva Adidev.

Many inventions appeared in this sea churning. It has a symbolic meaning. The brainstorming of knowledge and combination of researchers researching knowledge.

Various things came out of that churn, new inventions were made. Holy Cow (Gau )(cow KAMDHENU) (Gau also means knowledge), airplane, chariot, elephant, horse, gemstone, Vaidurya Mani (Diamond /kohenur), The stone to convert Metals into Gold, lotus, nectar, poison, celestial medicine. In a logical sense, these were new inventions, formulas, theses, and patent copyrights.

Here everything was distributed on the basis of merit, but who has the right to make the nectar that would make a human immortal, became a matter of dispute.

 Vishnu took this Amrit Kumbha and put it in four major places. Haridwar, Prayagraj, Ujjain and Nashik. Apart from this, drops of nectar also fell in other places of the country. Pushkar, and other Holy ponds. mountain peaks and beaches where there are shrines.

Now you consider and consider, scholars still gather in these places and at present, there are research conferences, Kumbh, discussion of knowledge all over the world. All the participants receive some fruits, rewards, rewards and new energy.

It is very humbly requested that from this article of mine, you please add your information and ask questions to me. Distribute it on all social media.

Thank you for reading.

Jai Bharat.

Dr. Vinod Mishra, PhD, M.Com, M.A. (Eco), M.T.A., M. Ed., M.B.A., M.A. (Hindi) M.A. (English), M.A. (Sanskrit)

कुंभ , KUMBH . What is Kumbh? Organised in India

 कुंभ का सामान्य अर्थ है मटका। 

किन्तु गहन अर्थ है ' वह स्थान या पात्र जहा कुछ एकत्रित , सुरक्षित  और संरक्षित रहे' . 



कुम्भ का नाम भारत के चार स्थानों हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में देवताओं की पवित्र सभा को दिया जाता है। वास्तव में ये विद्वानों , वैज्ञानिकों , विशेषज्ञों , शोधकर्ताओं , अन्वेषकों,और शोधार्थियों के साथ ही जिज्ञासुओं ,अनुयायियों, दर्शकों , मूल्याङ्कन कर्ताओं , की सभा एवं एकत्रीकरण भी था और अभी भी है।  आजकल शिक्षा संस्थानों, विश्वविद्यालयों एवं शाषकीय , अशाषकीय व निजी संस्थाओं प्रकाशकों  द्वारा भी विविध विषयो की अंतर्राष्ट्रीय , राष्ट्रीय, वैश्विक, शोध संगोष्ठी ( कांफ्रेंस Conference)  आयोजित की जाती हैं। इन सभाओं के साथ ही प्रायोजक अपना व्यापर करते है, और अन्य वपर भी फलता फूलता है। साड़ी गतिविधियां सृष्टि को चालयमान रखने हेतु एवं आर्थिक चक्र (Economy) को भी चालयमान रखने में सहायक होती रही हैं और सदियों से अर्थ प्राप्ति एक प्रमुख उद्देश्य रहा है।  हमारे यहाँ भारत में धनोपार्जन, व्यापार का कर्म सदैव सम्मानित रहे किन्तु अन्य कर्मों को भी समान सम्मान मिलता रहा।  धर्म अर्थ काम मोक्ष चरों पुरुषार्थ जीवन, सम्माज, और राष्ट्र रूपी रथ के चार चक्र हैं।  चरों में संतुलन, सामंजस्य, समता एवं समान वितरण, राजा, गुरु/आचार्य , माता पिता, व्यवस्था पालक, अधिकारी, मंत्री का नैतिक कर्त्तव्य था और है. उन्हे इस कार्य के लिये वेतन एवं पुरस्कार तथा श्रेष्ठ प्रशिक्षण भी दिया जाता था। 

अस्तु.....    

हमारे देश / भारत में हज़ारों वर्षों से ऐसी संगोष्ठियाँ होती रहीं।  विश्व भर के प्रतिनिधि विद्वान , जिज्ञासु इन संगोष्ठियों में आकर अपने शोध, महा शोध,   आविष्कार, प्रस्तुत करते, शास्त्रार्थ होता और इस प्रकार नई बातें और ज्ञान का प्रचार प्रसार होता था। 

कुम्भ चार वर्षांतर में आयोजित होते थे और राज्यों, जनपदों, विश्वविद्यालयों में ये सम्मलेन वार्षिक,अर्धवार्षिक अथवा समसामयिक होते रहते थे। जैसा आज भी होता है तब भी होता रहा कि इन्ही आयोजनों में संस्थाएं , व्यापारी, उद्योगपति, कर्मकार, अपने नएअनुबंध करते , नए कर्मचारी सहयोगी, अधिकारी चुनते और व्यक्ति भी उन्हें चुनते थे।  इन्हीं आयोजनों में नए रिश्ते भी बनते , स्वयंवर भी होते थे , अर्थात व्यापार और व्यवहार , धर्म और संस्कृति का विकास, विस्तार , संवर्धन भी होता था।  संगम साहित्य में भी इन सबका संक्षिप्त सांकेतिक उल्लेख किया गया है।  

कुम्भ की पौराणिक (नित नूतन) कथा इस प्रकार है कि समुद्र मंथन का आयोजन किया गया जिसमें संपूर्ण सृष्टि से विद्वान्, विशेषज्ञ, देवता पधारे।  दानव और मानव भी एकत्र हुए।  देवताओं और मानवों के गुरु बृहस्पति और दानवों के गुरु शुक्राचार्य।  ब्रह्मा जी ज्ञान के पितामह जनक , विष्णु, संरक्षक और शिव आदिदेव अधिष्ठाता चुने गए। । 

इस समुद्र मंथन में अनेको आविष्कार प्रगट हुए।  इसका प्रतीकात्मक अर्थ भी है। ज्ञान का शोध करने वाले शोधकर्ताओं के ज्ञान और संयोजन का मंथन। 

उस मंथन से विभिन्न वस्तुएं निकलीं, नए आविष्कार हुए। पुण्य गौ (गाय KAMDHENU) (गौ का अर्थ ज्ञान भी है), वायुयान , रथ , हाथी, घोड़ा, रत्न ,वैदूर्य मणि (कोहेनूर), धातुओं को सोने में परिवर्तित करने के लिए पारस पत्थर, कमल, अमृत, विष, दिव्य औषधियाँ। तार्किक अर्थों में ये थे नए अविष्कार, फॉर्मूले , थीसिस, सूत्र और पेटेंट कॉपीराइट थे। 

यहीं पर सब कुछ तो योग्यता के आधार पर वितरित हो गया किन्तु अमृत जो की मनुष्य को अमर बना देता उसका अधिकार किसके पास हो यह विवाद का विषय बना। 

 विष्णु ने इस अमृत कुम्भ को लेकर प्रमुख चार स्थानों पर डाल दिया. हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नाशिक।  इसके अतिरिक्त देश के अन्य स्थानों पर भी अमृत के बूंदे गिरी। पुष्कर,  एवं अन्य सरोवर पर्वत शिखर और समुद्र तटों पर जहाँ तीर्थ स्थान हैं। 



अब आप विचार कर देखें इन स्थानों पर आज भी विद्वान् एकत्र होते हैं और वर्तमान में विश्व भर में ज्ञान की चर्चा शोध सम्मलेन , कुम्भ होते रहते हैं। सभी प्रतिभागी कुछ फल,  प्रतिफल, पुरस्कार एवं नव ऊर्जा प्राप्त करते हैं।  

मेरे इस आलेख से आप अपनी जानकारी जोड़ें तथा और प्रश्न  करें। इसे सभी सोशल मीडिया पर वितरित करें। 

पढ़ने के लिये धन्यवाद।

जय भारत। 

डॉ विनोद मिश्र, PhD, एम् कॉम , एम् ए (अर्थ), एम् टी ए , एम् एड , एम् बी ए , एम् ए (हिंदी) एम् ए (अंग्रेजी), एम् ए (संस्कृत)     

Wednesday, 24 March 2021

Crore-pati Chaiwala Entrepreneur (No not honb'le Modi ji) MBA चायवाला

 आपकी सेवा में संघर्ष और सफलता की एक सत्य कथा प्रस्तुत कर रहा हूँ। 

MBA चायवाला।  .....MBA  की कक्षा से सातवे दिन ही सदा के लिए मुक्ति पा ली।  ...CAT में तीन साल तक असफलता।  बर्गर बनाने की दुकान में नौकरी। जहाँ  से ऍम बी ए करने का सपना देखा वहाँ पढ़ने का अवसर नहीं मिला लेकिन आज वहां भाषण /उद्बोधन देने मार्गदर्शन करने के लिए बुलाया जाता है।  हार्वर्ड , (IIM) भारतीय प्रबंध संस्थान और सभी नामी विश्वविद्यालय उसे अपने मंच पर सम्मानित करते हैं, सुनते हैं।  

.... नाम है ....  श्रीमान प्रफुल्ल बिल्लोरे अहमदाबाद अर्थात Mr Billore  Ahmedabad  यानि MBA .

प्रफुल्ल ने प्रारम्भिक शिक्षा धार (म प्र )से प्राप्त की और स्नातक करने के साथ और बाद में कैट (CAT) Common Admission Test, IIM से  एम बी ए. करने के लिए तीन साल तक लगातार मेहनत औरअसफल होने के बाद, फिर वही CAT परीक्षा ... कसम खा ली कि अब....  📚किताबों को हाथ नहीं लगाऊंगा। पुस्तकों को बाँध कर रख दिया। पूरा दिन सोये,  मन में उथल पुथल निराशा, दिल में तड़प लिए निकल पड़े ....  एक सवाल ... ? माता पिता के सपने.. ?  

पूरा देश घूमे बंगलुरू, मद्रास दिल्ली दक्षिण से उत्तर और फिर पश्चिम में अहमदाबाद में तन को छाँव --- मन को ठहराव  मिला। काफी भटकने और सोच विचार के बाद मैक्डोनाल्ड्स में नौकरी शुरू की ३७ रुपये प्रति घण्टा। अपनी कड़ी मेहनत से तरक्की पाते  गए लेकिन .!.. संतुष्टि नहीं...!  

मन बेचैन था.....!अपनी पहचान अपना आत्मसम्मान पाने को। 

प्रफुल्ल कहते हैं कि बर्गर देते, ट्रे उठाते उन्हें विचार आया कि जो काम मैं दूसरे के लिए कर रहा हूँ अपने लिए और अपना काम भी तो हो सकता है। 

बस नौकरी छोड़ दी ....अपना कॉफ़ी हाउस स्थापित करने के लिए.... जगह की तलाश की ....लेकिन १५ लाख रुपये की व्यवस्था कैसे करें.....? और उसके बाद भी तो पैसा लगेगा ...!.... 

२०१४ की एक शाम को विचारआया ......कि.... पूरे देश में सबसे ज्यादा क्या बिकता है ?... और हर घर में क्या पीया जाता है ? मुझे आज तक जीने का हौसला और पढाई करने में क्या चीज सहायक रही.......?

 चाय। ... 🍵 

अब चाय बेचेंगे।  सामने ही बर्तन की दुकान थी .....कुछ चाय के बर्तन ख़रीदे। पिताजी से पढाई करने के नाम पार पैसे मंगाए क्योंकि और किसी काम के लिए तो हिंदुस्तानी माता पिता पैसे देते नहीं.. डेढ़ महीना मन को मजबूत करते समझते बीत गया.... चाय बेचेगा लोग क्या कहेंगे..... साहस ही नहीं हो रहा..जिसने कभी खुद के लिए चाय नहीं बनाई वो चाय बनाएगा.....!... बेचेगा..!...परमेश्वर ने राह दिखाई हौसला मिला और......  

दुकान स्थापित कर दी...... बड़ा सपना..... छोटी शुरुआत....अभी शुरू करो.... लगे रहो (Dream Big , Start small, ...At now.... and Continue...) का अपना मंत्र लेकर ...!... चाय बनाई और इंतज़ार...!.... ग्राहक ही नहीं आये ,,, तब......! अगले दिन लोगों को चाय खुद जा कर दी और स्वाद बताने को कहा १५० रुपये की पांच चाय बिकी।  लोगो के लिए आश्चर्य था की अंग्रेजी बोलने वाला.... चाय वाला.!.... तीसरे दिन 600 चौथे दिन दो हजार पांचवे दिन पांच हजार....और...... 

चाय की दुकान चल निकली लेकिन आस पास के चाय वालों ने गुण्डे भेजकर और पुलिस से दबाव डलवाकर दुकान हटवा दी.. 

मैं फिर से बेकार हो गया  ग्राहकों के फ़ोन आते सोशल मीडिया पर पूछते , " भाई दुकान बंद क्यों कर दी ?" " चाय कब पिलाओगे?"

 मेँ पंद्रह दिन तक परेशान रहा। .. लोगो से मिलना चाय देना.....पैसे गिनना सब याद आता ....और..... बेचैनी बढ़ती जाती....!  

.....फिर एक हॉस्पिटल में जाकर चाय की दुकान डालने के लिए जगह माँगी.....उन्होंने तत्काल मेरी मदद की और १०,००० रुपए महीना पर जगह दे दी। चाय की दुकान चालू हो गयी ...

और....ग्राहक केवल चाय पीने आएंगे पैसे देंगे और.....और क्या...

 अब बारी थी कुछ नया करने की.... हर दिन कुछ समारोह हो लोगो की जिंदगी में अपनापन और खुशियाँ बाटने के लिए क्या करें। .. जन्मदिन.. शादी और नौकरी की सालगिरह 

चाय की दुकान में एक सफ़ेद बोर्ड लगाया.... जिसे भी नौकरी चाहिए वह अपने बारे में लिख दे ...share your thoughts...

सैकड़ों की नौकरी हमारी दुकान से लग चुकी , कई लोगो की जोड़ियाँ बनकर शादी हो गयी.....करोडो रुपये महीना कमाता हूँ तो देश में जहा भी ज़रूरत होती है हम वह सेवा करते हैं. केरल में बाढ़ , उड़ीसा में तूफान, और दुनिया में जहाँ भी कही आपदा आती है MBA चायवाला वहाँ सेवा के लिए पहुंच जाता है। 

अब दुकान का नाम क्या हो तो हज़ारो नाम में से नाम रखा MBA चायवाला.... लोगों ने मजाक बनाया लेकिन आज यही नाम है जो ख्याति दिला रहा है। ५० से जायदा लोगो की टीम एक परिवार है। देश भर में सात शाखाएँ  है।  दिल्ली में आप पार्टी के कार्यालय में भी दुकान है।  

प्रफुल्ल कहते हैं कोई भी काम काम होता है  सबसे बड़ा लोहार है टाटा TATAऔर सबसे बड़ा  मोची है बाटा BATA लेकिन काम तो वही है इसलिए छोटा काम सोच कर नहीं काम के महत्व को समझने से छोटा काम भी बड़ा हो जाता है। ब्रांड बन जाता है। जो काम आप को ठीक लगे उसे अपने तरीके से करिये और लोगो की जिंदगी में आप क्या महत्वपूर्ण कर सकते हैं उसे कर डालिये। 

भगवन श्री कृष्ण ने कहा है........

 श्रेयान्स्वधर्मो    विगुणः  परधर्मात्स्वनुष्ठितात ।  

स्वधर्मे    निधनं   श्रेयः    परधर्मो   भयावहः।।३५ ।। अध्याय ३।। कर्मयोग।।श्रीमद्भगवद्गीता।।

अर्थ - अपने नियत कर्मों को दोषपूर्ण ढंग से संपन्न करना भी अन्य के कर्मों को भलीभाँति करने से श्रेयस्कर है। स्वीय (अपने लिए) कर्मों को करते हुए मरना पराये कर्मों में प्रवृत्त होने की अपेक्षा श्रेष्ठतर है , क्योंकि अन्य किसी के मार्ग का अनुसरण भयावह होता है। 

प्रिय पाठको संघर्ष और सफलता की एक सत्य कथा है,  कैसी लगी ? आपने क्या सीखा ? क्या ऐसा है इस कहानी में  लिखा नहीं पर सन्देश छुपा हुआ है...... लिखियेगा।     


Tuesday, 23 March 2021

What is Vaidik Management ? वैदिक प्रबंधन क्या है?



वैदिक प्रबंधन - विद का अर्थ है ज्यान / ज्ञान। वैदिक का अर्थ हुआ जाना हुआ /ज्ञात।  प्रबंधन  का अर्थ है जो व्यवस्थित , क्रमित, सुगठित और तर्क एवं प्रयोग सिद्ध कार्य है।  इस प्रकार वेदो से जनित /जाना हुआ प्रयोग सिद्ध व्यवस्था का कार्य। वैदिक प्रबंधन का आधार है पुरुषार्थ।  धर्म ,अर्थ, काम, मोक्ष ये चार पुरुषार्थ हैं। इन पुरुषार्थों के लिए मनुष्य अपनी योजना / तत्परता भी आवश्यक है अतः यज्ञ कर्म को जानें।  यज्ञ कर्म (यजु का अर्थ जोड़ना) मनुष्य को प्रकृति , जीव जगत , अंतरिक्ष आकाश और ब्रह्म से जोड़ता है।  
अथर्ववेद का प्रथम मंत्र है " ये त्रिषप्ताः  परियंति विश्वा रूपाणि विभृतः।  वाचस्पतिर्बला तेषां तन्वोsअद्य दधातु मे। (१। १। १। १। )
अर्थ - ये त्रिषप्ताः = ३ x ७ =२१। ५ महाभूत , अग्नि , जल ,वायु, पृथ्वी, आकाश। ५ ज्ञानेन्द्रियाँ - आँख, कान ,नाक, जिव्हा, त्वचा। ५ कर्मेन्द्रियाँ - हाथ , पाँव , गुदा , उपस्थ (जननेन्द्रिय) और जिव्हा।  ५ प्राण- प्राण , अपान , व्यान , समान , उदान।  तथा १ अंतःकरण।  ऐसे २१ तत्वों में हे परमेश्वर आप विश्व के सब रूपों को धारण करते हुए (परियंती) सबमें व्याप्त हैं।  तेषां - उनके बल को (वाचस्पति) वेद वाणी के पति (प्रमुख) परमेश्वर   आज से मेरे शरीर में धारण करावें। 
  वैदिक प्रबंधन में शरीर , बुद्धि, मन, प्राण, चित्त के अनुशासन (धर्म ) के साथ 'कर्म' - अनुशासित , सुनियोजित , लक्ष्य केंद्रित किन्तु सजगता, समभाव एवं संवेदना के साथ विहित (वैध valid ) एवं निहित कार्य निष्पादन करना जिससे (अर्थ) के उपलब्धि हो किन्तु ऐसा अर्थ (धन) समस्त कर , दान एवं श्रम का मूल्य (राष्ट्र ऋण , गुरु व आचार्य ऋण , ऋषि ऋण, मातृ -पितृ ऋण , देव ऋण (प्रकृति ऋण) चुकाकर ही उपभोग किया जाये। इस प्रकार मोक्ष अर्थात सुख, समृद्धि, स्वस्थ्य एवं तृप्ति प्राप्त हो।  
उपरोक्त सभी में वित्त (Financial) प्रबंध, तकनीकी , नीति (ethics) , रणनीति (Strategic) प्रबंध, मानव संसाधन , पर्यावरण , अर्थशास्त्र, शरीर विज्ञान, राजनीति सभी का विस्तृत अध्ययन वैदिक प्रबंधन का विषय क्षेत्र है। 
विश्वास है की आपको यह वैदिक प्रबंधन की यह संक्षिप्त (synopsis) व्याख्या जिज्ञासा में अभिवृद्धि करेगी।  आप और अधिक अन्वेषण करने को उद्धत होंगे। 
सादर --- डॉ विनोद मिश्र (M Com , एम ए (अर्थ ), MTA (पर्यटन)  , MEd, MBA, एम ए (हिंदी), एम ए (अंग्रेजी) , एम ए (संस्कृत) . प्रबंध , उद्यमिता प्राध्यापक एवं प्रशिक्षक व्यक्तित्व विकास , योग, ध्यान, सुदर्शन क्रिया। एवं कॉर्पोरेट कौशल (एक्सीलेंस)  एवं स्वस्थता (वेलनेस) विशेषज्ञ।